एक समय था, गांव हो या शहर, डाकिये गली चौराहे पर नजर आते थे. अभी भी कई अहम दस्तावेज पोस्ट ऑफिस के जरिये ही आम आदमी तक पहुंचता है. हालांकि मौजूदा दौर में डाकिया की भूमिका थोड़ी बदल गई है, चिट्ठियां नहीं आती हैं. लेकिन जरूर दस्तावेज आज भी पोस्ट ऑफिस से घर-घर तक पहुंचता है. अब जरा सोचिए, अगर कोई डाकिया एक साल तक डाक नहीं बांटे तो क्या होगा?
ऐसा ही एक मामला रांची के कांके इलाके में सामने आया है. डाकिया ने एक साल तक कोई खत नहीं बांटा, सारा डाक को एक बोरी में डालकर कूड़े की तरह रख दिया. जो भी सुन रहा है, वो हैरान है, आखिर एक साल तक इस डाकिये ने डाक क्यों नहीं बांटी, और किसी ने इसकी शिकायत क्यों नहीं की?
हालांकि मामले सामने आते ही पोस्टल डिपार्टमेंट डाकिया को सस्पेंड कर दिया है. मामला रांची के पिठोरिया डाक घर का है. डाकिया की इस हरकत से लोगों का पोस्ट ऑफिस के प्रति थोड़ा विश्वास डिगा है. क्योंकि देश में अभी भी पोस्ट ऑफिस को भरोसे का प्रतीक माना जाता है.
पोस्ट मैन की हरकत से लोग गुस्से में
दरअसल, कांके के पिठोरिया पोस्ट ऑफिस की घोर लापरवाही से लोग गुस्से में हैं. इस पोस्ट ऑफिस में तैनात डाकिया पिछले एक साल से डाक ही नहीं बांट रहा था, बल्कि महत्वपूर्ण दस्तावेजों को बोरों में भरकर घर में छिपाकर रखा था. लगातार शिकायत के बाद और स्थानीय लोगों ने जब मामले को लेकर हंगामा किया तो फिर विभाग हरकत में आया. जांच बैठाई गई.
जांच के बाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने बताया कि डाकिया के बैग और ऑफिस के बगल में मौजूद कबाड़ में तलाशी लेने के बाद सच सामने आ गया. वहां बोरों में भरे हुए ढेर सारे दस्तावेज बरामद हुए. इन बोरों में लोगों के महत्वपूर्ण आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, बैंक पासबुक के साथ-साथ लोक अदालत और आयकर विभाग के बेहद जरूरी नोटिस भी शामिल थे. यह लापरवाही आम लोगों के लिए न केवल परेशानी का सबब बनी, बल्कि कई लोगों को समय पर नोटिस न मिलने के कारण आर्थिक और कानूनी नुकसान भी उठाना पड़ा है.
बोरी से बरामद अहम दस्तावेज
इस गंभीर लापरवाही के बाद पोस्ट ऑफिस के इंस्पेक्टर दीपक कुमार ने जांच और सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं. इंस्पेक्टर ने स्पष्ट किया है कि संबंधित डाकिया को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. साथी इतनी बड़ी लापरवाही को लेकर जिस स्तर पर भी गड़बड़ियां हुई हैं, उन सभी पर भी कार्रवाई होगी. साथ ही भरोसा दिलाया है कि एक 'स्पेशल ड्राइव' चलाई जाएगी, जिसके तहत उन सभी अटकी हुई चिट्ठियों और दस्तावेजों को चिन्हित कर प्राथमिकता के आधार पर सही लाभार्थियों तक पहुंचाया जाएगा.
यह एक बेहद गंभीर मामला है. सरकारी व्यवस्था में इस तरह की लापरवाही किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है. आखिर डाकिया ने ऐसा क्यों किया, उसकी दिमागी संतुलन ठीक है या नहीं, या वो किसी के कहने पर ये कर रहा था ये सब जांच का विषय है. आम लोगों को पोस्ट ऑफिस के लापरवाही से जो नुकसान हुआ उसका भरपाई कौन करेगा ये भी बड़ा सवाल है.
सत्यजीत कुमार