वेदांता कैसे कर रहा भविष्य की तैयारी, 20 बिलियन डॉलर का दांव

वेदांता डिमर्जर के बाद 3-5 साल में $20 बिलियन निवेश की तैयारी में है, जिसका बड़ा हिस्सा अंदरूनी कैश जेनरेशन से आएगा और फोकस कर्ज घटाने पर रहेगा.

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Vedanta Chairman Anil Agarwal Vedanta Chairman Anil Agarwal

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:17 AM IST

वेदांता का अगला दांव $20 billion का है. समूह अगले 3-5 साल में यह निवेश करना चाहता है. इसका बड़ा हिस्सा अंदरूनी कैश जेनरेशन से लाने की तैयारी है. यह कदम Vedanta Ltd के डिमर्जर के बाद आया है, जिसमें 5 अलग लिस्टेड कंपनियां बन रही हैं. आधिकारिक वजह शेयरहोल्डर वैल्यू खोलना है, लेकिन Vedanta Resources का कर्ज घटाना भी अहम है. मई 2020 की डिलिस्टिंग कोशिश पूरी नहीं हुई थी. अक्टूबर में प्रक्रिया 90% सार्वजनिक हिस्सेदारी टेंडर के स्तर से 7% पीछे रह गई. श्रीराम सुब्रमणियन के मुताबिक, शेयरहोल्डर Rs 87.5 के भाव से खुश नहीं थे. उस समय स्टॉक Rs 79.6 पर था.

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कर्ज और डिमर्जर

राकेश अरोड़ा के मुताबिक, Vedanta Resources का कर्ज FY22 के $8.9 billion से FY26 के अंत तक $4.7 billion हुआ. Vedanta Ltd का net debt to EBITDA ratio FY24 में 1.61x था. यह FY25 में 1.2x और FY26 में 0.95x पर आया. उनका कहना है, "दबाव का वाल्व साफ खुल गया है." अरोड़ा के मुताबिक, Vedanta Aluminium या Hindustan Zinc में 5% हिस्सेदारी बेचना आसान है. यह विविध वेदांता में 5% बेचने से आसान है. इन 5 कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड कर्ज चुकाने के लिए अहम रहेगा.

कम लागत की ताकत
अग्रवाल का कहना है, "अल्युमिनियम, जिंक, सिल्वर, पावर या स्टील, हमारी लागत सबसे कम है." अरोड़ा के मुताबिक, HZL की लागत FY26 की आखिरी तिमाही में $903 प्रति टन रही. यह ग्लोबल औसत से 30-35% कम थी, और जिंक कारोबार 50% से ज्यादा EBITDA मार्जिन दे रहा है. EcoZen लॉन्च होने से रियलाइजेशन में प्रीमियम भी जुड़ा. FY26 में अल्युमिनियम लागत $1,752 प्रति टन रही. Balco में यह $2,313 से $1,792 प्रति टन आई.

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स्केल, परियोजनाएं और चिंता

कंपनी राजस्थान में फॉस्फेट फर्टिलाइजर प्लांट लगाना चाहती है, क्योंकि रॉक फॉस्फेट वहीं बनता है. जिंक स्मेल्टिंग से निकलने वाले सल्फर डाइऑक्साइड को सल्फ्यूरिक एसिड में बदला जा सकता है. Kotak Institutional Equities के मुताबिक, Vedanta Aluminium की भारत में क्षमता हिस्सेदारी 62% है. करीब 2.9 mtpa क्षमता इसे ग्लोबल टॉप उत्पादकों में रखती है. राज गायकड़ के मुताबिक, लागत बढ़त जिंक में सबसे मजबूत है. अल्युमिनियम में यह ठोस है, लेकिन स्टील और पावर में कम साबित हुई है.

अगर आप निवेशक हैं, तो समझिए कि वेदांता का दांव सबसे ज्यादा अल्युमिनियम और जिंक पर है. अरोड़ा के मुताबिक, 10% अल्युमिनियम कीमत बढ़ने पर EBITDA में $641 million जुड़ते हैं. यही असर जिंक में $278 million और ऑयल में $38 million है. FY26 में राजस्थान ब्लॉक का उत्पादन 16% गिरा, और गुजरात के Cambay basin में कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने की अर्जी खारिज हुई. Cairn Oil & Gas भारत के कच्चे तेल उत्पादन का करीब 25% देता है. इस हिस्से में ONGC और रिलायंस की बढ़त भी बनी हुई है. लेकिन OALP का बड़ा मौका 2028-30 से पहले नहीं माना जा रहा.

गायकड़ के मुताबिक, 3-5 साल के $20-billion कैपेक्स में करीब $4 billion ऑयल एंड गैस पर झुकाव है. करीब $4 billion अल्युमिनियम पर जा सकता है. बाकी $12 billion भी तय हैं. इसमें $2.5 billion पावर और $2 billion जिंक व सिल्वर शामिल हैं. $7.5 billion आयरन ओर, स्टील और दूसरे कारोबारों के लिए हैं. अरोड़ा का कहना है कि मौजूदा वित्त वर्ष का लक्ष्य अंदरूनी कैश जेनरेशन से कवर हो रहा है. FY28-30 की तस्वीर कमोडिटी कीमतों और अंदरूनी रणनीति से तय होगी. भारत में अल्यूमिना विस्तार, बॉक्साइट-कोल इंटीग्रेशन और Gamsberg जिंक विस्तार जैसी योजनाएं आगे हैं.

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देवेन आर चोक्सी के मुताबिक, मौजूदा कमोडिटी चक्र का रुख अभी सकारात्मक है. उनका कहना है कि वाइट मेटल्स और फेरस में साफ अपसाइड है. 20% डोमेस्टिक कंटेंट वाली बैटरी स्टोरेज डायरेक्टिव निकल और मैंगनीज मांग बढ़ा सकती है. कंपनी सितंबर 2022 में Foxconn के साथ $19.5 billion सेमीकंडक्टर JV तक गई थी. लेकिन एक साल से कम समय में उससे पीछे हट गई. अग्रवाल का कहना है, "मैं उसके बारे में सच में नहीं सोचता." वह अब साफ कह रहे हैं कि फोकस 5 कंपनियों और नैचुरल रिसोर्सेज पर है. अब नजर इस पर होगी कि डिमर्जर के बाद यह फोकस, कम लागत और $20-billion निवेश कितना डिलीवर होता है.

(बिजनेस टुडे की रिपोर्ट)

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