फैक्ट्री लगाने में गुजरात से पीछे रह गया ओडिशा, अब चाहिए जापान से कर्ज?

मौजूदा केन्द्र सरकार ने इसे लागू करने में जल्दबाजी दिखाई हालांकि जीएसटी लागू करने की तैयारी बीते 17 वर्षों से केन्द्र और राज्य की सरकारें कर रही हैं. बेहेरा ने जीएसटी में आ रही दिक्कतों पर कहा कि यह दिक्कतें महज ट्रान्जीशन के दौरान देखने को मिलेगी.

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 ओडिशा में 50 फीसदी गांव आज भी बैंकिंग नेटवर्क से बाहर है लिहाजा नोटबंदी से लोग परेशान हुए ओडिशा में 50 फीसदी गांव आज भी बैंकिंग नेटवर्क से बाहर है लिहाजा नोटबंदी से लोग परेशान हुए

राहुल मिश्र

  • भुवनेश्वर,
  • 27 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 12:17 PM IST

इंडिया टुडे समूह के पहले स्टेट ऑफ स्टेट ओडिशा कॉन्क्लेव में ओडिशा के वित्त मंत्री शशी भूषण बेहेरा ने शिरकत की. स्टेट ऑफ स्टेट ओडिशा चैप्टर की शुरुआत करते हुए इंडिया टुडे समूह के एडियोरियल डायरेक्टर राज चेनगप्पा ने कहा कि इंडिया टुडे मैगजीन ने ओडिशा की आर्थिक स्थिति का जायजा लेने के लिए मंच पर ओडिया सरकार, इंडस्ट्री लीडर्स और कृषि से लेकर टेक्नोलॉजी तक के जानकारों को मंच पर एकत्र किया. इस सत्र के दौरान राज्य के वित्त मंत्री ने बताया कि आर्थिक विकास की दौड़ में वह गुजरात से कैसे और कहां पिछड़ गया है.

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इस सत्र के सवाल-जवाब सत्र के दौरान राज चेनगप्पा ने शशि बेहरा ने कहा कि जीएसटी को 1 जुलाई से लागू करना एक जल्दबाजी में उठाया गया कदम था. मौजूदा केन्द्र सरकार ने इसे लागू करने में जल्दबाजी दिखाई हालांकि जीएसटी लागू करने की तैयारी बीते 17 वर्षों से केन्द्र और राज्य की सरकारें कर रही हैं. बेहेरा ने जीएसटी में आ रही दिक्कतों पर कहा कि यह दिक्कतें महज ट्रान्जीशन के दौरान देखने को मिलेगी. जीएसटी काउंसिल प्रति माह मुलाकात कर रही है और राज्यों को आने वाली दिक्कतों का हल निकालने की कवायद की जा रही है.

बेहेरा ने कहा कि जीएसटी पूरी दुनिया में चर्चित मॉडल है. लगभग 166 देशों ने एक टैक्स स्लैब वाला जीएसटी लागू कर रखा है. हालांकि हमारे देश में 5 टैक्स स्लैब वाला जीएसटी लागू किया गया है.

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राज चेनगप्पा ने पूछा कि नोटबंदी का क्या असर ओडिशा में देखने को मिला है. बेहेरा ने बताया कि नोटबंदी महज एक पेपर वॉर था. बहुत कम मात्रा में कैश बचा रहा जो अर्थव्यवस्था में वापस नहीं आया. लिहाजा सवाल है कि आखिर ब्लैकमनी कहां है?

बेहेरा ने कहा कि ओडिशा में 50 फीसदी गांव आज भी बैंकिंग नेटवर्क से बाहर है. लिहाजा आप अंदाजा लगा सकते हैं कि राज्य में नोटबंदी के बाद ग्रामीण इलाकों में लोगों को पुरानी करेंसी के बदले नई करेंसी लेने में कितना नुकसान उठाना पड़ा है.

राजद ने बेहेरा से पूछा कि क्या केन्द्र की मोदी सरकार ने बीते तीन साल के दौरान उनके राज्य के साथ न्याय किया है. बेहेरा ने बताया कि केन्द्र से रेलवे, नेचुरल कलैमिटी जैसे तमाम क्षेत्रों में राज्य को केन्द्र से न्याय देखने को नहीं मिला है.

सत्र के दौरान बेहेरा से पूछा गया कि नोटबंदी के दौरान ओडिशा और बिहार की सरकारों ने स्वागत किया था. नवीन पटनायक ने भी इसका स्वागत किया था. लेकिन अब राज्य सरकार कह रही है कि नोटबंदी से नुकसान पहुंचा. बेहेरा ने कहा कि नोटबंदी बतौर नीति ठीक कदम था लेकिन इसे ठीक तरह से लागू नहीं किया गया.

बेहेरा से अजीत झा ने पूछा कि देश के नक्शे में एक छोर पर गुजरात है और दूसरे छोर पर ओडिशा है. लेकिन गुजरात की तुलना में क्यों ओडिशा इतना पिछड़ा हुआ है? बेहेरा ने बताया कि ओडिशा में 17-18 साल से सरकार ने विकास की शक्ल को बदलने की कोशिश की है. इस दौरान इंडस्ट्री और एग्रीकल्चर के क्षेत्र में ओडिशा ने बड़ा काम किया है. लेकिन फैक्ट्री लगाने में राज्य पिछड़ा है जहां गुजरात को ज्यादा फायदा पहुंचा है. इस अंतर को खत्म करने के लिए हमें केन्द्र सरकार और विदेशों से बड़े लोन की आवश्यकता है जिससे ओडिशा भी गुजरात की तरह चमक सके.

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