चुनाव से पहले तेज हुई रुपये की रफ्तार, जानें क्‍या है वजह

भारतीय रुपये की तेज गति अभी भी कायम है और चुनावी माहौल में शेयर बाजार में भी मजबूती देखने को मिल रही है. बीते सात कारोबारी दिन में सेंसेक्‍स 1600 अंक के करीब मजबूत हुआ है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 2:44 PM IST

लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. चुनावी माहौल के बीच भारतीय शेयर बाजार में मजबूती देखने को मिल रही है. बीते सात कारोबारी दिन में सेंसेक्‍स 1600 अंक के करीब मजबूत हुआ है. वहीं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया की स्थिति में भी सुधार होता दिख रहा है. पिछले कारोबारी हफ्ते में रुपया 6 महीने के उच्‍चतम स्‍तर पर पहुंच गया. बाजार के जानकारों के मुताबिक आने वाले महीनों में रुपये में और मजबूती आने वाली है.    

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7 महीने के हाई पर 

इस हफ्ते सोमवार के कारोबार में रुपया सात महीने के उच्‍चतम स्‍तर  68.53 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ. सोमवार के कारोबार के दौरान एक समय रुपया मजबूत होकर 68.44 तक के स्‍तर पर पहुंच गया, यह पिछले साल 2 अगस्त के बाद भारतीय करेंसी का सबसे मजबूत लेवल है. वहीं सोमवार तक के छह कारोबारी सत्रों में रुपये में 161 पैसे की तेजी आई. हालांकि मंगलवार और बुधवार को रुपये में गिरावट दर्ज की गई लेकिन इसके बावजूद यह बीते साल के मुकाबले मजबूत बना हुआ है.  डीलरों ने कहा कि मंगलवार को विदेशी बाजारों में कच्चा तेल चार महीने के उच्चतम स्तर 67.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, इस वजह से रुपये पर दबाव रहा. हालांकि अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं की तुलना में डॉलर के नरम होने से रुपये की गिरावट पर कुछ लगाम रही.

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क्‍या है रुपये में मजबूती की वजह 

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक रुपये में मजबूती की मुख्‍य वजह विदेशी निवेशकों का निवेश है. फरवरी महीने में भारतीय शेयर बाजार में 2.42 अरब डॉलर का विदेशी पूंजी आया, जो पिछले 15 महीनों में सबसे अधिक है. इसके अलावा घरेलू स्तर पर भारत और पाकिस्‍तान के बीच टेंशन कम होने और एयर स्ट्राइक के बाद स्टेबल गवर्नमेंट की उम्मीद बढ़ने की वजह से भी रुपये ने रफ्तार पकड़ी है. वहीं व्यापार घाटे का आंकड़ा कम होने के कारण भी रुपये ने बढ़त बनाई है. अजय केडिया के मुताबिक रुपया मौजूदा स्तर से 150 पैसे तक और मजबूत हो सकता है. 

पिछले साल सबसे कमजोर रुपया 

अगर रुपये की सबसे कमजोर स्थिति की बात करें तो पिछले साल डॉलर के मुकाबले 10 फीसदी तक टूटा. 11 अक्टूबर 2018 को रुपया एक डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड 74.48 के स्तर तक जा गिरा था. ऐसे में डॉलर के मुकाबले अगर अन्य करेंसी को लेकर देखा जाए तो रुपया 2018 के नुकसान की कुछ हद तक भरपाई कर चुका है. 

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