जियो प्लेटफॉर्म्स में एक और बड़े निवेश का ऐलान, अमेरिकी कंपनी KKR लगाएगी 11367 करोड़

अमेरिका के इक्विटी फर्म KKR द्वारा जियो प्लेटफॉर्म्स में 1.5 अरब डॉलर (करीब 11,367 करोड़ रुपये) के निवेश का ऐलान किया गया है. लॉकडाउन के बीच भी रिलायंस इंडस्ट्रीज की किस्मत में लगातार चांदी ही दिख रही है. रिलायंस समूह की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स में लगातार विदेशी कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं. एक महीने के भीतर ही रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स में फेसबुक इंक, जनरल अटलांटिक, सिल्वर लेक और विस्टा इक्विटी पार्टनर्स के द्वारा निवेश का ऐलान किया जा चुका है.

Advertisement
रिलायंस के जियो प्लेटफॉर्म्स में लगातार हो रहा विदेशी निवेश रिलायंस के जियो प्लेटफॉर्म्स में लगातार हो रहा विदेशी निवेश

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2020,
  • अपडेटेड 10:20 AM IST

  • जियो प्लेटफॉर्म्स में लगातार विदेशी कंपनियां कर रहीं निवेश
  • अमेरिकी कंपनी KKR ने किया 11,367 करोड़ निवेश का ऐलान
  • कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स में 2.32 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी

लॉकडाउन के बीच भी रिलायंस इंडस्ट्रीज की किस्मत में लगातार चांदी ही दिख रही है. रिलायंस समूह की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स में लगातार कई अमेरिकी कंपनियां भारी निवेश कर रही हैं. अब अमेरिका के इक्विटी फर्म KKR के द्वारा भी जियो प्लेटफॉर्म्स में 1.5 अरब डॉलर (करीब 11,367 करोड़ रुपये) के निवेश का ऐलान किया गया है.

Advertisement

इन कंपनियों ने किया है निवेश

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक केकेआर इस निवेश से जियो प्लेटफॉर्म्स में 2.32 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदेगी. इसके पहले एक महीने के भीतर ही रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स में फेसबुक इंक, जनरल अटलांटिक, सिल्वर लेक और विस्टा इक्विटी पार्टनर्स के द्वारा निवेश का ऐलान किया जा चुका है. दुनिया में जब दूसरी कंपनियां अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही हैं, अंबानी ने लॉकडाउन के बीच कुछ ही हफ्तों के भीतर फेसबुक, जनरल अटलांटिक, सिल्वर लेक और विस्टा इक्विटी पार्टनर जैसी चार विदेशी कंपनियों से सौदे किए हैं. असल में 'न्यू कॉमर्स' के रूप में रिलायंस को ग्रोथ का नया इंजन मिल गया है.

रिलायंस का न्यू कॉमर्स

जुलाई 2018 में जब अंबानी ने अपने 'न्यू कॉमर्स' वेंचर की स्थापना की थी तो उन्होंने कहा था कि इसमें भारत के खुदरा कारोबार को नई परिभाषा देने की क्षमता है और यह अगले वर्षों में रिलायंस के लिए नया ग्रोथ इंजन बन सकता है. इसके द्वारा रिलायंस डिजिटल और फिजिकल बाजार का एकीकरण करेगी और एमएसएमई, किसानों, किराना दुकानदारों के विशाल नेटवर्क का दोहन किया जाएगा. अमेरिका की दिग्गज कंपनी फेसबुक के साथ डील कर कंपनी इसके स्वामित्व वाले वॉट्सऐप की व्यापक पहुंच का फायदा उठाएगी और अपने न्यू कॉमर्स बिजनेस की गाड़ी को तेज गति प्रदान करेगी.

Advertisement

इसे भी पढ़ें:

रिलायंस इंडस्ट्रीज जियो को सिर्फ टेलीकॉम ऑपेरटर नहीं बल्कि एक डिजिटल कंपनी के रूप में विकसित कर रही है. मुकेश अंबानी रिलायंस को अब एनर्जी फोकस वाली कंपनी बनाए रखने की जगह विविधता वाली कंपनी बनाने पर जोर दे रहे हैं. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने साल 2006 में खुदरा कारोबार और 2010 में टेलीकॉम कारोबार में प्रवेश किया था.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »