पूंजीगत खर्च बढ़ाने की गुंजाइश नहीं, निर्यात सुस्त रहेगा, टैक्स लक्ष्य पाना मुश्किल: CMIE

सरकार के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाने की गुंजाइश नहीं दिख रही, निर्यात में सुस्ती है टैक्स संग्रह के लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं दिख रहा. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने यह बात कही है.

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CMIE ने जारी किया इकोनॉमी पर रिपोर्ट CMIE ने जारी किया इकोनॉमी पर रिपोर्ट

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 13 जून 2019,
  • अपडेटेड 12:28 PM IST

सरकार के लिए पूंजीगत खर्च (capex) बढ़ाने की गुंजाइश नहीं दिख रही, निर्यात में सुस्ती है टैक्स संग्रह के लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं दिख रहा. मई महीने की मैक्रो इकोनॉमिक परफॉर्मेंस की समीक्षा के आधार पर सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने यह बात कही है. सीएमआईई ने आर्थ‍िक वृद्धि, राजकोषीय अनुशासन, महंगाई और निर्यात जैसे कई प्रमुख संकेतकों के आधार पर यह समीक्षा जारी की है.

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कमजोर रहेगी निवेश की मांग

CMIE ने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7 फीसदी रह सकती है, लेकिन निवेश की मांग कमजोर बनी रहेगी. समीक्षा में यह कहा गया है कि भारत सरकार ने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य राजकोषीय प्रबंधन के द्वारा नहीं बल्कि 'आंकड़ों की बाजीगरी' से हासिल किया है. सीएमआईई ने कहा कि खुदरा महंगाई आगे बढ़ेगी, लेकिन यह रिजर्व बैंक के चार फीसदी के लक्ष्य से कम ही रहेगी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2019-20 के लिए कर संग्रह का लक्ष्य बहुत ज्यादा है और इसे हासिल कर पाना मुश्किल है. CMIE ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कटौती करना बैंक कर्ज में बढ़त सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं है.

रिपोर्ट में CMIE ने कहा है, 'हमें लगता है कि वित्त वर्ष 2019-20 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7 फीसदी के आसपास रह सकती है. निवेश मांग कमजोर ही रहेगी, क्योंकि भारतीय कंपनियां क्षमता का इस्तेमाल कम करेंगी. पूंजीगत खर्च बढ़ाने की गुंजाइश नहीं है, जैसा कि मोदी प्रथम सरकार के शुरुआती दौर में देखा गया है. दूसरी तरफ, नई नौकरियों में बढ़त न होने से शहरी खपत भी कमजोर रहेगी. मॉनसून में देरी होने से ग्रामीण क्षेत्रों के खर्च में भी अनिश्चितता के बादल छा गए हैं.

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निर्यात सुस्त रहेगा

रिपोर्ट में कहा गया है, 'आगे की बात करें तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती और ट्रेड वॉर सुलझ न पाने की वजह से निर्यात में बढ़त सुस्त ही रहने के आसार हैं. दूसरी तरफ, अगर कच्चे तेल की कीमतों में ज्याद बढ़त नहीं हुई तो भारत का आयात बिल भी बहुत ज्यादा बढ़ने के आसार नहीं हैं. वर्ष 2019-20 में चालू खाते का घाटा करीब 2 फीसदी रहेगा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में थोड़ा कम है. एफडीआई में मामूली बढ़त, एफआईआई की वापसी से विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त हो सकती है.'

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने भी 2019-20 में जीडीपी बढ़त के अपने अनुमान को 7.2 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी कर दिया है.

राजकोषीय प्रबंधन में आंकड़ों का खेल

समीक्षा में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने 2018-19 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.4 फीसदी तक करने का जो लक्ष्य हासिल किया है, वह 'आंकड़ों का खेल' है. फरवरी, 2019 तक हालत यह थी कि भारत को 8.5 लाख करोड़ रुपये का विशाल घाटा था, जो मार्च 2019 में 2.1 लाख के सरप्लस में बदल गया.

(www.businesstoday.in से साभार)

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