Nikhil Kamath Books: इन 5 किताबों ने बदल दी अरबपति की सोच, क्या आपने पढ़ीं हैं?

निखिल कामथ की 5 किताबों की सूची दिखाती है कि निवेश के फैसले सिर्फ फॉर्मूला से नहीं चलते, धैर्य, मनोविज्ञान और बचे 36 साल की सोच भी उतनी ही अहम है.

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निखिल कामथ की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा बनी है.  (Photograph by Hardik Chhabra) निखिल कामथ की कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणा बनी है. (Photograph by Hardik Chhabra)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:06 PM IST

34 की उम्र में जेरोधा के को-फाउंडर निखिल कामथ ने हिसाब लगाया कि औसत जीवनकाल के आधार पर उनके पास करीब 36 साल बचे हैं. यह गणना किसी वित्तीय स्प्रेडशीट से नहीं, बल्कि अर्नेस्ट बेकर की किताब द डिनायल ऑफ डेथ से निकली.

स्टॉकब्रोकिंग की संख्या-आधारित दुनिया से आने वाले कामथ के लिए यह सोच बड़ा मोड़ साबित हुई. उनके सामने सवाल सिर्फ धन बनाने का नहीं रहा. फोकस मानव व्यवहार, मनोविज्ञान और सीमित समय को समझने पर चला गया.

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पैसे की समझ: मॉर्गन हाउसल की द साइकोलॉजी ऑफ मनी, कामथ की 5 पसंदीदा किताबों में शामिल है. उनके मुताबिक, किताब का पहला हिस्सा उन लोगों से जुड़ता है जो जीवन में भाग्यशाली रहे हैं. दूसरा हिस्सा उन लोगों से बात करता है, जिन्हें वैसी किस्मत नहीं मिली. किताब का तर्क है कि पैसे के साथ अच्छा करना सिर्फ जानकारी का मामला नहीं, बल्कि व्यवहार का मामला है. धैर्य और विनम्रता जैसे गुण लंबे समय की वित्तीय सफलता को आगे बढ़ाते हैं.

समाज और मृत्युबोध: इजाबेल विल्करसन की कास्ट छिपी और गहरी सामाजिक श्रेणियों को सामने लाती है. यह भारत, नाजी जर्मनी और अमेरिका की नस्लीय असमानता के बीच समानताएं भी खींचती है. इस भारी विषय पर कामथ ने कहा, "कास्ट, जैसे दुनिया में पहले से कम समस्याएं हैं." उन्होंने इसे 10 में 7 अंक दिए.

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सबसे गहरा असर द डिनायल ऑफ डेथ का रहा. इसे उन्होंने "साल की किताब" कहा और 10 में 8 अंक दिए. किताब कहती है कि इंसानी ड्राइव, महत्वाकांक्षा और संस्कृति के पीछे मृत्यु का दबा हुआ डर काम करता है. यही बात कामथ को अपने बचे समय का हिसाब लगाने तक ले गई.

संकट और मानव व्यवहार: रायन हॉलिडे की स्टिलनेस इज द की को कामथ ने "पैंडेमिक के दौर में पढ़ने के लिए अच्छी किताब" बताया. किताब दिखाती है कि बड़े नेता भागदौड़ से नहीं, भीतर की शांति से बड़े संकट संभालते हैं. यह मानसिक शोर घटाने, तेज भावनाओं को संभालने और दबाव में साफ सोच बनाने की बात करती है.

रिचर्ड डॉकिंस की द सेल्फिश जीन को कामथ ने 10 में 6 अंक दिए. यह किताब प्राकृतिक चयन का फोकस जीवों से हटाकर जीन पर रखती है. साथ ही, यह बताती है कि कई निस्वार्थ दिखने वाले व्यवहार भी जेनेटिक सर्वाइवल से जुड़े हो सकते हैं. किताब "मेम" को सांस्कृतिक ट्रांसमिशन की इकाई के रूप में भी सामने लाती है.

अगर आप निवेशक हैं, तो कामथ की यह सूची सीधा संकेत देती है कि पैसों के फैसले सिर्फ फॉर्मूला से नहीं चलते. धैर्य, विनम्रता, सामाजिक समझ, दबाव में शांति और मानव व्यवहार को पढ़ना भी उतना ही जरूरी है.

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अब नजर इस पर होगी कि कामथ की यह रीडिंग लिस्ट निवेश, जीवन और फैसलों पर बातचीत को किस दिशा में ले जाती है. फिलहाल उनकी 5 पसंद यही दिखाती हैं कि बैलेंस शीट से आगे की समझ भी बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है.

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