हर साल 10 करोड़ का बोनस मिला था IL&FS के डायरेक्टर्स को, अब वापस लेने की तैयारी

संकटग्रस्त कंपनी IL&FS और उसके समूह की दो अन्य कंपनियों के पूर्व निदेशकों को मिला करोड़ों रुपये का बोनस सरकार के नियंत्रण वाला बोर्ड वापस मांगने पर विचार कर रहा है.

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हर साल 10 करोड़ बोनस मिला था IL&FS के डायरेक्टर्स को हर साल 10 करोड़ बोनस मिला था IL&FS के डायरेक्टर्स को

दिनेश अग्रहरि

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2019,
  • अपडेटेड 4:23 PM IST

संकटग्रस्त कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनेंशियल सर्विसेज (IL&FS) और उसके समूह की दो अन्य कंपनियों के पूर्व निदेशकों को मिला करोड़ों रुपये का बोनस सरकार के नियंत्रण वाला बोर्ड वापस मांगने पर विचार कर रहा है. इसके पहले आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के मामले में ऐसा किया जा चुका है.

समूह की दो अन्य कंपनियों में IL&FS ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क्स इंडिया (ITNL) और IL&FS फाइनेंशियल सर्विस (IFIN) शामिल हैं. गंभीर जालसाजी जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा IL&FS में कुप्रंधन की पुष्ट‍ि के बाद ही सरकार करीब एक महीने पहले से इस पर विचार कर रही है.

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इकोनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि बोर्ड तीनों कंपनियों के पूर्व निदेशकों (नामांकित और स्वतंत्र निदेशकों सहित) से पांच साल में (2012-13 से 2017-18 तक) मिले सभी बोनस और फायदों को वापस मांगने पर विचार कर रहा है. बोर्ड को हर डायरेक्टर से 10 करोड़ और हर स्वतंत्र डायरेक्टर से 2 करोड़ हर साल के हिसाब से वापस लेना है.

यह वापसी कंपनी अधिनियम की धारा 199 के तहत होगी जो किसी कंपनी को इस बात की इजाजत देता है कि वह किसी जालसाजी या कानून के पालन न होने पर निदेशकों को मिले पैकेज को वापस मांग सके. कंपनी का बोर्ड जालसाजी के लिए पूर्व निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज करने की भी तैयारी कर रहा है.

गौरतलब है कि देश का गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी क्षेत्र आसन्न संकट के मुहाने पर खड़ा है. कुछ बड़ी कंपनियों द्वारा की गई गडबड़ियों और कर्ज की तंगी से इस क्षेत्र के ध्वस्त होने का फॉर्मूला तैयार हो चुका है. इंडिया टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक IL&FS ग्रुप 2012 की शुरुआत में गंभीर समस्याओं से घिर गया था. वहीं 2014 के आम चुनावों से पहले ही कंपनी के पास बड़ी संख्या में खटाई में पड़े प्रोजेक्ट्स एकत्र हो गए.

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SFIO ने संकट में फंसी कंपनी आईएलऐंडएफएस (IL&FS) के पूर्व वाइस चेयरमैन हरि शंकरन को अप्रैल महीने में गिरफ्तार कर लिया था.

कंपनी में वित्तीय अनियमितता का खुलासा तब हुआ जब पिछले साल समूह की कुछ कंपनियां कर्ज वापस करने में डिफाल्ट करने लगीं. इस डिफॉल्ट के चलते वित्तीय बाजार में उच्च स्तर की रेटिंग से गिरकर कंपनी को डिफॉल्ट रेटिंग दी गई है.

सरकार ने कंपनी बोर्ड का टेकओवर कर लिया है और कंपनी को सुचारु तरीके से चलाने के लिए एक समाधान योजना पर काम कर रही है. सूत्रों के मुताबिक पूर्व में कंपनी ने कर्ज देने के काम में सावधानी नहीं बरती और आज उसके सामने डूबने का संकट मंडरा रहा है.  

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि आईएलऐंडएफएस कंपनी दिवालिया हुई तो बाजार में भूचाल आ जाएगा. इस कंपनी पर 91 हजार करोड़ का कर्ज है जो माल्या, चौकसी और नीरव मोदी के घोटाले से सात गुना बड़ा मामला है.

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