पहली बार खरीदने जा रहे हैं अपने 'सपनों का घर', जान लीजिए ये 5 कड़वे सच

पहली बार घर खरीदने जा रहे हैं तो जान लीजिए कि आपकी एक छोटी सी चूक जीवन भर की कमाई को जोखिम में डाल सकती है. अगर घर खरीदते समय बजट, लोकेशन और बिल्डर की बारीकी से जांच न की जाए, तो सुखद एहसास वाला यह सपना महंगे तनाव और ईएमआई के जाल में फंसाने वाला हो सकता है.

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घर खरीदने से पहले इन बातों का रखें खास ख्याल (Photo: Pexels) घर खरीदने से पहले इन बातों का रखें खास ख्याल (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:52 PM IST

अपना घर खरीदना हर इंसान का सबसे बड़ा सपना होता है. सिर पर अपनी छत और सुकून की नींद के लिए हम अपनी जिंदगी भर की कमाई लगा देते हैं. लेकिन अक्सर सपनों का आशियाना चुनने के उत्साह में हम कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका खामियाजा दशकों तक ईएमआई और मानसिक तनाव के रूप में भुगतना पड़ता है.

जल्दबाजी में लिया गया एक गलत फैसला आपके इस सुखद अनुभव को बुरे सपने में बदल सकता है. अगर आप भी पहली बार घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए किसी सेफ्टी मैनुअल से कम नहीं है.

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1. आमदनी और ईएमआई के बीच बिठाएं सही तालमेल

घर खरीदने की प्रक्रिया कागजों से नहीं, बल्कि आपके बजट से शुरू होनी चाहिए. आपकी महीने की किस्त (EMI) आपकी कुल इन हैंड सैलरी के 30-40 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर आप इस सीमा को लांघते हैं, तो घर तो मिल जाएगा लेकिन आपकी लाइफस्टाइल और अन्य जरूरी खर्चे बुरी तरह प्रभावित होंगे. इसके अलावा, लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपने क्रेडिट कार्ड स्कोर को दुरुस्त करें, क्योंकि एक मजबूत स्कोर आपको बैंक से ब्याज दरों पर सौदेबाजी करने की ताकत देता है.

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2. डाउन पेमेंट का गणित और वित्तीय सुरक्षा चक्र

लोन का बोझ कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका है बड़ा डाउन पेमेंट. कोशिश करें कि घर की कुल कीमत का कम से कम 25 से 30 फीसदी हिस्सा आप पहले ही चुका दें. इससे न केवल आपकी मासिक किस्त कम होगी, बल्कि पूरे लोन कार्यकाल के दौरान आप लाखों रुपये का ब्याज बचा सकेंगे. हालांकि, डाउन पेमेंट जुटाने के चक्कर में अपने रिटायरमेंट फंड या बच्चों की पढ़ाई के लिए किए गए निवेश को हाथ न लगाएं. साथ ही, 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर एक इमरजेंसी फंड अलग रखें ताकि नौकरी या बिजनेस में उतार-चढ़ाव आने पर आपकी छत सुरक्षित रहे.

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3. लोकेशन के चुनाव में दूरदर्शिता है सबसे जरूरी

अक्सर लोग बजट के चक्कर में शहर के बाहरी इलाकों में सस्ता घर चुन लेते हैं, जो बाद में महंगा साबित होता है. इसलिए, घर ऐसी जगह लें जहां से ऑफिस, स्कूल और अस्पताल नजदीक हों. क्योंकि, कनेक्टिविटी खराब होने पर रोजमर्रा के सफर में लगने वाला वक्त और पैसा आपके मानसिक चैन को छीन सकता है. खरीदारी से पहले यह जरूर देखें कि उस इलाके में भविष्य में मेट्रो या सड़कों का जाल बिछने वाला है या नहीं. साथ ही, जलभराव और सुरक्षा जैसे पहलुओं की जांच करना कभी न भूलें.

4. बिल्डर के वादों से ज्यादा उसके ट्रैक रिकॉर्ड पर भरोसा करें

रियल एस्टेट के बाजार में चमक-धमक वाले विज्ञापनों और भारी डिस्काउंट की कमी नहीं है. लेकिन एक समझदार खरीदार वही है जो बिल्डर की साख यानी उसकी क्रेडिबिलिटी को सबसे ऊपर रखे. जल्द पजेशन के दावों में फंसने के बजाय RERA की वेबसाइट पर जाकर बिल्डर के पुराने प्रोजेक्ट्स और शिकायतों का रिकॉर्ड चेक करें. अगर बिल्डर ने पहले भी प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी में देरी की है, तो वहां निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है. एक भरोसेमंद बिल्डर ही आपके सपनों की चाबी समय पर आपके हाथ में दे सकता है.

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5. कानूनी पेचीदगियों को न करें नजरअंदाज

घर खरीदना सिर्फ एक फिजिकल डील नहीं बल्कि एक कानूनी प्रक्रिया है. प्रॉपर्टी के सारे पेपर्स, टाइटल डीड और डिजाइन अप्रूवल को बारीकी से जांचें. कई बार खरीदार उत्साहित होकर एग्रीमेंट के बारीक अक्षरों को पढ़ना भूल जाते हैं, जिससे भविष्य में पजेशन या अतिरिक्त चार्जेस को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है. अगर जरूरत पड़े तो किसी कानूनी विशेषज्ञ की सलाह लें, ताकि आपकी मेहनत की कमाई किसी कानूनी उलझन में न फंसे और आप अपने नए घर में बिना किसी चिंता के प्रवेश कर सकें.

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