भारत में घर बनाना हमेशा से एक लंबी प्रक्रिया रही है, जिसमें महीनों या कई साल का समय लग जाता है और साथ ही भारी मजदूरी भी. कई बार तो वक्त पर मजदूरों के न मिलने से भी समस्या होती है. लेकिन जल्द ही इन सभी परेशानियों का समाधान हो सकता है, क्योंकि 'फोल्डेबल हाउस' हर मुश्किल को आसान बना देगा.
Uprear Build जैसे स्टार्टअप्स ने इस तकनीक को भारत की जरूरतों के हिसाब से पेश किया है. कंपनी का दावा है कि उनकी कंपनी 4 घंटे में घर बनाकर डिलिवर कर देती है. घर का स्ट्रक्चर फैक्ट्री में तैयार किया जाता है और उसे ट्रक पर डिलिवरी के लिए रखा जाता है.
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कितनी होगी कीमत?
इस तकनीक की सटीक कीमत घर के साइज, इस्तेमाल किए गए मटेरियल और कस्टमाइजेशन पर निर्भर करती है, लेकिन इस स्टार्टअप और इस क्षेत्र की अन्य कंपनियों के मॉडल के आधार पर अनुमानित कीमतें शुरुआती कीमत भारत में छोटे मॉड्यूलर या फोल्डेबल केबिन कमरों की कीमत ₹5 लाख से ₹15 लाख के बीच शुरू हो सकती है.
पारंपरिक घरों की तुलना में इनकी शुरुआती लागत थोड़ी अधिक लग सकती है, लेकिन समय और लेबर की बचत इसे किफायती बनाती है. फिलहाल Uprear Build सरकारी प्रोजेक्ट्स जैसे आंगनवाड़ी और छोटे सार्वजनिक भवनों पर काम कर रहा है, जहां ये यूनिट्स काफी कम समय और नियंत्रित बजट में तैयार की जा रही हैं.
विदेश में ऐसे घरों की कितनी है कीमत?
यूरोप और अमेरिका में फोल्डेबल घरों का चलन काफी पुराना है, वहां कई प्रसिद्ध कंपनियां हैं जो इस तरह के घर बेचती हैं. अमेरिका में एलन मस्क द्वारा प्रमोट किए गए 'Boxabl' जैसे स्टार्टअप्स काफी मशहूर हैं. एक स्टैंडर्ड 400 वर्ग फीट के फोल्डेबल घर (जिसे Casita कहा जाता है) की कीमत लगभग $50,000 to $60,000 करीब 42 से 50 लाख रुपये से शुरू होती है. वहीं लग्जरी फोल्डेबल होम्स की कीमत €80,000 से €1,50,000 तक जा सकती है. चीन इस मामले में सबसे सस्ता बाजार है, जहां बेसिक फोल्डेबल यूनिट्स $10,000 (करीब 8 लाख रुपये) में भी उपलब्ध हैं.
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ये घर कैसे काम करते हैं?
यह पूरी तरह से 'प्लग एंड प्ले' मॉडल है, घर की दीवारें, फर्श, छत, बिजली की वायरिंग और पाइपलाइन सब कुछ फैक्ट्री में तैयार होता है, इन घरों को फोल्ड करके एक बड़े ट्रक पर रखा जाता है और आपकी साइट (प्लॉट) तक पहुंचाया जाता है. साइट पर पहुंचने के बाद, क्रेन और विशेषज्ञों की मदद से इसे मात्र 4 घंटों में खोलकर खड़ा कर दिया जाता है.
क्या ये घर मजबूत होते हैं?
भारतीय स्टार्टअप का दावा है कि ये घर 30 से 40 साल तक चल सकते हैं. हालांकि, पारंपरिक कंक्रीट के घर 70-80 साल चलते हैं, लेकिन इन घरों का मुख्य उद्देश्य लचीलापन और स्पीड है. यानी अगर आप चाहें, तो कल अपना घर समेटकर किसी दूसरे शहर में भी ले जा सकते हैं. अगर आप जल्दी घर चाहते हैं और आपके पास अपनी जमीन है, तो यह तकनीक गेम-चेंजर है. भारत में अभी यह शुरुआती चरण में है, इसलिए कीमतें थोड़ी ऊपर हो सकती हैं, लेकिन उत्पादन बढ़ने के साथ इनके और सस्ते होने की उम्मीद है.
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