चीन में अनोखा कारोबार, लोगों को हंसाने के मिल रहे पैसे, 400 अरब डॉलर का बाजार

चीन में युवा अपने भविष्य को लेकर लगातार चिंतित हो रहे हैं, जिसके कारण वे अब ऐसी "फील-गुड" चीजों और अनुभवों पर खर्च कर रहे हैं जो उन्हें "इमोशनल वैल्यू" देती हैं.

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चीन में इमोशनल वैल्यू ट्रेंड (Photo-ITG) चीन में इमोशनल वैल्यू ट्रेंड (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:37 PM IST

चीन के रियल एस्टेट संकट और आर्थिक सुस्ती के बीच वहां के युवाओं में भविष्य को लेकर अनिश्चितता और मानसिक तनाव काफी बढ़ गया है. घटती सैलरी और रिकॉर्ड तोड़ युवा बेरोजगारी के इस दौर में, चीन की युवा आबादी अब भौतिक चीजों पर पैसा खर्च करने के बजाय मानसिक सुकून और खुशी देने वाले अनुभवों को तरजीह दे रही है.

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न्यूयॉर्क टाइम्स की एक हालिया खोजी रिपोर्ट के अनुसार, चीन में इस समय “qíng xù jià zhí” (Emotional Value) खरीदने का एक अनोखा और बड़ा बाजार खड़ा हो चुका है, जो इस समय करीब 400 अरब डॉलर का हो चुका है.

चीन के युवा इस मानसिक तनाव को एक बिजनेस मॉडल में बदल रहे हैं और दूसरों को 'खुशी' बेचकर खुद मोटी कमाई कर रहे हैं.

क्या है 'इमोशनल वैल्यू' का यह बिजनेस?

चीनी सोशल मीडिया और विज्ञापनों में इन दिनों यह शब्द हर तरफ छाया हुआ है. कंपनियां अकेलेपन को दूर करने वाले एआई (A.I.) पेट्स से लेकर अनजानी खुशियां देने वाले 'ब्लाइंड बॉक्स' तक, सब कुछ इसी 'इमोशनल वैल्यू' के नाम पर बेच रही हैं. यहां तक कि कुछ स्थानीय सरकारों ने भी अपनी वार्षिक आर्थिक रिपोर्टों में इस उभरते हुए बाजार का जिक्र किया है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2029 तक यह मार्केट 70 प्रतिशत की दर से और बड़ा हो जाएगा.

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न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में चीन के दो ऐसे ही युवाओं की कहानी साझा की गई है, जो इस क्रेज का सीधा फायदा उठा रहे हैं. पूर्वी चीन में 20 साल के कॉलेज छात्र लू झाओयू लोगों को देश के सबसे प्रसिद्ध पहाड़ों में से एक, 'माउंट ताई' की चढ़ाई कराने में मदद करते हैं, लेकिन वह एक आम गाइड नहीं हैं. लू सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों के साथ विज्ञापन करते हैं और चोटी तक पहुंचने के रास्ते में ग्राहकों को भरपूर मानसिक और भावनात्मक सहयोग देने का वादा करते हैं.

लू अपने क्लाइंट्स को सिर्फ रास्ता नहीं दिखाते, बल्कि रास्ते में रुकने पर ताजे फल देते हैं, चढ़ाई पूरी होने पर शैंपेन से जश्न मनाते हैं और जब ग्राहक पूरी तरह थक जाते हैं, तो उन्हें पीठ पर उठाकर भी चलते हैं.

इस 6 घंटे की कठिन यात्रा के लिए ग्राहक उन्हें लगभग 100 डॉलर (करीब 8,300 रुपये) देते हैं. लू के अनुसार, उनके अधिकांश ग्राहक 20 से 30 साल की कामकाजी महिलाएं होती हैं, जो व्यावहारिक चीजों के बजाय अपनी मानसिक संतुष्टि और खुशी पर पैसा खर्च करना चाहती हैं. कई बार लू को महसूस होता है कि वह गाइड कम और एक 'थेरेपिस्ट' ज्यादा हैं.

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30 साल के ए लांग कई अलग-अलग नौकरियां बदलने के बाद अब मध्य चीन के एक थीम पार्क में काल्पनिक किरदारों की पोशाक पहनने वाले कलाकार के रूप में काम कर रहे हैं. यह थीम पार्क अपने विज्ञापन में दावा करता है कि उनके गुड-लुकिंग कलाकार पर्यटकों को मात्र 15 डॉलर (लगभग 1,250 रुपये) में "फुल इमोशनल एक्सपीरियंस" देते हैं.

चीन का यह 'इमोशनल वैल्यू' मार्केट इस बात का बड़ा उदाहरण है कि जब अर्थव्यवस्था सुस्त होती है, तो इंसानी भावनाएं और मानसिक जरूरतें किस तरह एक नए और विशाल कमर्शियल मार्केट का रूप ले लेती हैं.

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