होर्मुज के भरोसे कब तक? 30 साल से अटका था... अब गुजरात से ओमान तक भारत करेगा ये काम

ओमान से गुजरात के बीच पाइपलाइन बिछने जा रही है. यह एक ऐसा प्रोजेक्‍ट है, जो होर्मुज को पीछे छोड़ते हुए भारत की बिना रुकावट गैस की आपूर्ति पूरा करेगा.

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ओमान से गुजरात के बीच पाइपलाइन. (Photo: AI Generated) ओमान से गुजरात के बीच पाइपलाइन. (Photo: AI Generated)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 09 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:29 PM IST

वेस्‍ट एशिया में तनाव के बीच एनर्जी संकट ने दुनिया को सतर्क कर दिया है. खासकर भारत जैसे देश, जो मिडिल ईस्‍ट से सप्‍लाई रुकने के बाद सबसे ज्‍यादा प्रभातिव हुए है. ऐसे में भारत तेजी से अपने एनर्जी सप्‍लाई को निर्बाध करने में जुटा हुआ है.  भारत ने ओमान से गुजरात के बीच एक लंबी पाइपलाइन बिछाने के प्रोजेक्‍ट का ऐलान कर दिया है.  

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यह अरब सागर के पार लगभग 2,000 किलोमीटर लंबी एक गहरे समुद्र में बिछाई जाने वाली गैस पाइपलाइन होगी. यह ओमान और गुजरात को जोड़ने की लंबे समय से चर्चित योजना है, क्योंकि भारत तेजी से अनिश्चित भू-राजनीतिक तनाव के बीच अधिक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है. 

पिछले तीन दशकों में इस परियोजना की कई बार समीक्षा की गई है, लेकिन उच्च लागत, तकनीकी बाधाओं और व्यावसायिक  दिक्‍कतों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई. अब, इस प्रस्ताव को सपोर्ट करने वाले प्राइवेट ग्रुप SAGE द्वारा मार्ग और इसकी इंजीनियरिंग चुनौतियों का वैल्‍यूवेशन करने के लिए समुद्र तल सर्वे के साथ-साथ तकनीकी और वित्तीय अध्ययन पूरा करने के बाद इस परियोजना को नई गति मिली है. 

कितना आएगा खर्च? 
अनुमान है कि इस प्रोजेक्‍ट के तहत करीब  40,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. यह ओमान-गुजरात डीप-सी गैस पाइपलाइन, अब तक के सबसे गहरे समुद्री मार्गों में से एक होगी. यह नेचुरल गैस की निर्बाध सप्‍लाई करेगी. अगर ये पाइपलाइन बन जाती है, तो इससे खाड़ी देशों और भारत के बीच एक सीधा ऊर्जा गलियारा स्थापित हो सकता है, जिससे देश की होर्मुज जलडमरूमध्‍य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो जाएगी. 

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यह परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत आयातित ऊर्जा पर काफी हद तक निर्भर है. देश अपनी ज्‍यादातर कच्चे तेल की जरूरतों का आयात करता है और प्राकृतिक गैस, विशेष रूप से एलएनजी की विदेशी आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर है. इन आयातों का एक बड़ा हिस्‍सदा खाड़ी देशों से आता है और फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाले संकरे मार्ग, होर्मुज के माध्‍यम से भारत पहुंचता है. इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट ग्‍लोबल मार्केट्स पर तुरंत असर डाल सकता है. इससे शिपिंग कॉस्‍ट, ईंधनी की कीमतें और आप‍ूर्ति चेन प्रभावित हो सकती हैं. 

कैसी दिखेगी ये पाइपलाइन? 
प्रस्‍तावित प्रोजेक्‍ट, अरब सागर में फैले एक पानी के नीचे के नेटवर्क के माध्‍यम से ओमान को सीधे गुजरात से जोड़ेगी. इसकी सबसे खास बात, इसकी गहराई है. मार्ग का कुछ हिस्सा समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक नीचे होने की संभावना है, जिससे यह अब तक प्रस्तावित सबसे गहरी समुद्री पाइपलाइन परियोजनाओं में से एक बन जाएगी. इतनी गहराई ज्‍यादातर अपतटीय ऊर्जा परियोजनाओं में पाई जाने वाली गहराइयों से कहीं अधिक है और इसके लिए अत्यधिक विशेष इंजीनियरिंग समाधानों की आवश्यकता होगी. 

गैस आने में कितना होगा खर्च? 
इस पाइपलाइन के माध्यम से दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों के तहत प्राकृतिक गैस का परिवहन होने की उम्मीद है, जिससे संभावित रूप से भारत को अपने ऊर्जा सोर्स में विविधता लाने में मदद मिलेगी. साथ ही ओमान को एक स्थिर निर्यात बाजार भी मिलेगा. परियोजना प्रस्तावों के अनुसार, परिवहन लागत 2-2.25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के बीच हो सकती है. हालांकि अंतिम लागत फंडिंग व्यवस्था, निर्माण व्यय और भविष्य में गैस की कीमतों पर निर्भर करेगी. 

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