मिडिल ईस्ट में जंग के कारण दुनिया भर में तेल-गैस का संकट आ चुका है. इस बीच, इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए उद्योगपति गौतम अडानी के बेटे करण अडानी ने कहा कि किसी भी तरह का जियो-पॉलिटिकल टेंशन सप्लाई चेन को प्रभावित करता है. पिछले 4 से 5 साल में सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुई है.
कोविड से लेकर रूस-यूक्रेन वॉर तक और अब ईरान वॉर ने ग्लोबल सप्लाई चेन को प्रभावित किया है. वहीं अगर हम देखें तो पिछले कुछ सालों में भारत समेत कई देशों ने ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत किया है. ऐसे किसी भी देश के लिए खुद के लिए ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना, जो वॉर या अन्य चीजों से प्रभावित ना हो मुश्किल है.
अभी के हालत पर अडानी ग्रुप फुल ग्रियर में काम कर रहा है, जो भी कार्गो भारत आ रहे हैं, चाहे वह कच्चा तेल हो या एलपीजी हो, हम उसे हैंडल करने पर ज्यादा फोकस हैं. क्योंकि यही अभी भारत की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हमे खुशी है कि हम इस सचिुएशन में देश के काम आ पा रहे हैं.
एनर्जी संकट पर क्या बोले करण अडानी?
उन्होंने कहा कि अभी के सिचुएशन से हर कमोडिटी, जो हम आयात करते हैं, वह प्रभावित हुई हैं. चाहे वह कच्चा तेल हो, एलपीजी या फिर अन्य गैस. उन्होंने कहा कि हमें एनर्जी में अल्टरनेटिव चीजों के बारे में सोचना चाहिए, जो हम इम्पोर्ट करते हैं, क्या हमारे पास कच्चा तेल का ऑप्शन है, क्या हमारे पास गैस का विकल्प है? इन चीजों के अल्टरनेटिव पर फोकस करना चाहिए और इम्पोर्ट को कम करने की कोशिश करनी चाहिए. भारत के पास कोयला से लेकर खुद के क्रूड तक बहुत रिर्सोसेज मौजूद हैं.
भारत में एनर्जी बदलाव
हमें इन चीजों के प्राइवेटाइज के बारे में भी सोचना चाहिए, जो देश की जरूरत हो और देश के हक मे हो. उन्होंने कहा कि भारत में एनर्जी चेंज 2014-15 के बाद आया, जब भारत ने रिन्यूवेबल एनर्जी को लेकर ऐलान किया. अडानी ने कहा कि रिन्यूवेबल एनर्जी भौगोलिक ऊर्जा को लेकर बड़ा बदलाव रहा है और आगे तेजी से बढ़ने वाला है.हम बैटरी सेक्टर को देखें या फिर न्यूक्लियर सेक्टर को, प्राइवेट प्लेयर के लिए ये सेक्टर ओपेन होने के बाद बड़े स्तर पर बदलाव आया है और आगे भी बदलाव आता रहेगा. कुछ सालों में और भी देश नेट जीरो की तेजी से आगे बढ़ेंगे.
ग्रुप के बारे में क्या गलत बोला जाता है?
करण अडानी ने कहा कि हम अपने बारे में सोचते हैं कि हम क्या सही कर रहे हैं या क्या गलत कर रहे हैं . हम नरेटिव के बारे में नहीं सोचते हैं हम देश की ग्रोथ स्टोरी के बारे में बात करते हैं. यह अडानी का असेट नहीं है, बल्कि देश का है. अगर आपकी नियत साफ है तो सब सही होगा. अगर आपका काम देशहित के लिए सही है तो फोकस रहना चाहिए और इसी के साथ आगे बढ़ना चाहिए.
आजतक बिजनेस डेस्क