Akshaya Tritiya Gold Demand: ₹20000Cr की होगी बिक्री! सोना-चांदी महंगा, फिर भी अक्षय तृतीया पर तगड़ी डिमांड

Gold-Silver की कीमतें पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा होने के बाद भी अक्षय तृतीया पर ग्राहकों में जोश दिख रहा है. कैट का अनुमान है कि इस साल बिक्री 20000 करोड़ रुपये रह सकती है.

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अक्षय तृतीया पर गोल्ड-सिल्वर की जमकर खरीदारी. (Photo: AI Generated) अक्षय तृतीया पर गोल्ड-सिल्वर की जमकर खरीदारी. (Photo: AI Generated)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:26 PM IST

सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rate) हाई से काफी कम हो चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी सोना 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार चल रहा है, तो वहीं चांदी की कीमत भी 2.50 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार है. इसके बावजूद अक्षय तृतीया के मौके पर गोल्ड-सिल्वर डिमांड तेज बनी हुई है. रिकॉर्ड तेजी के बीच खरीद के तरीके जरूर बदले हैं फिर भी Akshaya Tritiya पर 20,000 करोड़ रुपये के व्यापार का अनुमान है, जो बीते साल हुए व्यापार से काफी अधिक है. 

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समृद्धि का प्रतीक माने जाने वाले अक्षय तृतीया पर भारत में सोना खरीदने का महत्व है. इस साल ये पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है और सर्राफा मार्केट्स में जमकर खरीदारी हो रही है. कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष अक्षय तृतीया के मौके पर करीब 16,000 करोड़ रुपये के गोल्ड-सिल्वर सेल हुई थी, जबकि इस बार बिक्री का ये आंकड़ा 20,000 करोड़ रुपये पर पहुंचने का अनुमान है. अकेले दिल्ली में यह व्यापार लगभग 6000 करोड़ रुपये का अनुमान जाहिर किया गया है. 

Gold खरीदारी का केंद्र 
चांदनी चौक से सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि अक्षय तृतीया पारंपरिक रूप से सोना खरीदने के लिए भारत में सबसे शुभ अवसरों में से एक मानी जाती है. ऐसी मान्यता है कि कीमती धातुओं में इस दिन किया गया निवेश स्थायी समृद्धि लेकर आता है. उन्होंने कहा कि हालांकि सोना अभी भी खरीदारी का केंद्र बना हुआ है, लेकिन तेजी से बढ़ती कीमतों के चलते खरीदारी के तरीके में स्पष्ट बदलाव दिख रहा है.

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2026 में अक्षय तृतीया पर सोने की कीमत पिछले साल के लगभग 1 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से बढ़कर लगभग 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई है. चांदी की बात करें तो ये बीते साल के 85,000 प्रति किलो से बढ़कर अब 2.55 लाख प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है. कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी ने उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव किया है, लेकिन  ऊंची कीमतों के बावजूद डिमांड कम नजर नहीं आ रही है. हालांकि, लोग अब अधिक सोच-समझकर और वैल्यू बेस्ड खरीदारी कर रहे हैं.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया ने कहा कि लोग हल्के वजन के आभूषण, रोजमर्रा में पहने जाने वाले डिजाइन और चांदी व हीरे की ज्वेलरी पर अधिक ध्यान दे रहे हैं. इसके साथ ही मेकिंग चार्ज में छूट और छोटे गोल्ड कॉइन पर ज्वेलर्स द्वारा दिए जा रहे ऑफर से ग्राहकों को खरीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है. 

हर ज्वेलर की कितनी बिक्री? 
जहां एक ओर कुल व्यापार का मूल्य बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक मात्रा में गिरावट एक अलग ही तस्वीर पेश कर रही है. कैट के सहयोगी संगठन ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा के साझा किए आंकड़ों के अनुसार, 16,000 करोड़ के अनुमानित सोने के व्यापार का मतलब वर्तमान कीमतों पर लगभग 10,000 किलो (10 टन) सोने की बिक्री है.

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इसे देशभर के अनुमानित 2 से 4 लाख ज्वैलर्स में बांटा जाए, तो प्रति ज्वेलर औसतन सिर्फ 25 से 50 ग्राम सोने की बिक्री होती है, जो मात्रा में स्पष्ट गिरावट को दर्शाता है. इसी तरह 4,000 करोड़ के चांदी के व्यापार को देखें, तो करीब 1,56,800 किलो (करीब 157 टन) चांदी की बिक्री है, जिससे प्रति ज्वेलर औसतन सिर्फ 400 से 800 ग्राम चांदी की बिक्री होती है.

उन्होंने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से व्यापार मूल्य तो बढ़ रहा है, लेकिन वास्तविक खपत घट रही है. यही वजह है कि इस वर्ष बाजार में हल्के आभूषण और छोटे सिक्कों की डिमांड ज्यादा है. ज्वेलर्स के लिए स्टॉक मैनेजमेंट बड़ी चुनौती है, फिर भी अक्षय तृतीया की सकारात्मक भावना के चलते बाजारों में अच्छी ग्राहकी देखी जा रही है.

अरोड़ा ने कहा कि डिजिटल गोल्ड, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) जैसे वैकल्पिक निवेश विकल्पों की ओर भी लोगों का रुझान बढ़ रहा है.

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