रिलायंस-फ्यूचर डील में ब्रेक! एमेजॉन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते में मांगा जवाब 

रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप की डील में हाईकोर्ट से मिली राहत के ख‍िलाफ एमेजॉन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. फ्यूचर ग्रुप का जवाब मिलने के बाद फिर एमेजॉन को प्रत्युत्तर फाइल करने के लिए दो हफ्ते का समय मिलेगा.

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई   सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली ,
  • 22 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 12:44 PM IST
  • रिलायंस-फ्यूचर डील में सुनवाई
  • एमेजॉन ने ली है सुप्रीम कोर्ट की शरण
  • SC ने फ्यूचर ग्रुप को नोटिस जारी किया

रिलायंस-फ्यूचर डील में फिर कुछ समय के लिए ब्रेक लगती दिख रही है. सुप्रीम कोर्ट ने एमेजॉन की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को फ्यूचर ग्रुप को नोटिस जारी किया है. फ्यूचर ग्रुप को जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया गया है. रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप की डील में हाईकोर्ट से मिली राहत के ख‍िलाफ एमेजॉन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. 

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इस मामले में आगे सुनवाई पांच हफ्ते बाद होगी. फ्यूचर ग्रुप का जवाब मिलने के बाद फिर एमेजॉन को प्रत्युत्तर फाइल करने के लिए दो हफ्ते का समय मिलेगा. गौरतलब है कि पूंजी बाजार नियामक सेबी ने भी फ्यूचर ग्रुप को रिलायंस को अपने रिटले एसेट बेचने की योजना को मंजूरी जनवरी में दे दी है. 

कोर्ट पर नजर 

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कुछ शर्तों के साथ इस सौदे को मंजूरी दे दी है. पिछले साल अगस्त में इस सौदे की घोषणा की गयी थी. सेबी ने यह भी कहा है कि फ्यूचर-रिलायंस ग्रुप के इस सौदे पर सेबी की अनुमति अदालत में लंबित मामलों के नतीजों पर निर्भर करेगी.  यानी इस मामले में अब अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट ही करेगा.  

क्या है मामला 

रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी कंपनी रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) ने फ्यूचर ग्रुप के रिटेल ऐंड होलसेल बिजनेस और लॉजिस्टिक्स ऐंड वेयरहाउसिंग बिजनेस को खरीदने का सौदा पिछले साल किया था. यह डील 24,713 करोड़ में फाइनल हुई है. लेकिन फ्यूचर रिटेल की पहले से सहयोगी एमेजॉन ने इस डील पर आपत्ति की है.

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उसने सिंगापुर में मध्यस्थता अदालत से लेकर सेबी, कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया. यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में गया और वहां से फ्यूचर रिटेल को राहत मिल गई थी. दिल्ली उच्च न्यायालय के डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट के ही एकल न्यायाधीश के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) और रिलायंस रिटेल के बीच हुई डील को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया था.  

 

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