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बांस की खेती पर किसानों को 50 हजार रुपये की सब्सिडी, जानिए क्या है राष्ट्रीय बांस मिशन योजना

भारत के कई राज्यों के किसान बंजर भूमि या मौसम की मार से परेशान रहते हैं. ऐसे में बांस की खेती उनके लिए वरदान साबित हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार बांस के पौधों के लिए किसी खास तरह की उपजाऊ जमीन की आवश्यकता नहीं होती है.

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Image credit: Ministry of Agriculture & Farmers' Welfare
Image credit: Ministry of Agriculture & Farmers' Welfare
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बांस की खेती किसानों के लिए वरदान
  • किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायक

चीन के बाद बांस की खेती के मामले में भारत दूसरा सबसे बड़ा देश है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि किसान बांस की खेती करने से कतरा रहे हैं. ऐसे में केंद्र सरकार की तरफ से राष्ट्रीय बांस मिशन योजना (https://nbm.nic.in/) के तहत इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार इस योजना के अंतर्गत किसानों को बांस की खेती करने पर 50 हजार रुपये की सब्सिडी देती है और छोटे किसान को एक पौधे पर 120 रुपये की सब्सिडी देने का प्रावधान है.

बंजर जमीन पर भी की जा सकती है बांस की खेती

भारत के कई राज्यों के किसान बंजर भूमि या मौसम की मार से परेशान रहते हैं. ऐसे में बांस की खेती उनके लिए वरदान साबित हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार बांस के पौधों के लिए किसी खास तरह की उपजाऊ जमीन की आवश्यकता नहीं होती. इसकी खेती कहीं भी की जा सकती है. राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission) के अनुसार में देश में इस समय 136 बांस की प्रजातियों की खेती की जा रही है, जिनमें से 125 स्वदेशी और 11 विदेशी प्रजातियां हैं. कृषि मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार भारत हर साल 13.96  मिलियन टन बांस का उत्पादन भी करता है.

उद्देश्य

1.गैर वन शासकीय एवं निजी क्षेत्र में बांस के वृक्षारोपण के क्षेत्र में वृद्धि करना.
2. कृषि आय के पूरक के लिए भूमि और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन में योगदान के लिए.
3. उद्योगों के लिए गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की आवश्यकता की उपलब्धता के लिए बांस की खेती को बढ़ावा देना.
4. मुख्य रूप से किसानों के खेतों, घरों में इसके वृक्षारोपण को बढ़ावा देने का प्रयास करना.
5. सामुदायिक भूमि, कृषि योग्य बंजर भूमि, और सिंचाई नहरों, जल निकायों पास बांस की खेती को बढ़ावा देने की कोशिश करना.
 

40 से 50 साल तक मुनाफा देता है ये पौधा

आमतौर पर बांस की खेती तीन से चार साल में तैयार होती है. किसान चौथे साल में कटाई शुरू कर सकते हैं. इसके अलावा खास बात ये भी है कि अगर आप 2.5 मीटर की दूरी पर एक-एक पौधे को लगाते हैं, तो बीच में खाली पड़ी जगहों पर आप पशुओं के लिए चारा या कोई अन्य फसल उगा सकते हैं. इसके अलावा आप खेतों के मेढ़ों पर भी इसके पौधे लगा सकते हैं. साथ ही यह एक बार लगाने के बाद 40-50 साल मुनाफा देने वाला पौधा है. लगभग इतने साल तक ये पौधा जिंदा रहता है. हर कटाई के बाद बांस का पौधा फिर से विकास करने लगता है. साथ ही इसकी खेती से आप हर साल एक हेक्टेयर में कुल 3 से 4 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं.

आने वाले समय में और बड़ा होगा बाजार

सरकार जिस तरह इस क्षेत्र को लेकर काम कर रही है आने वाले समय बांस किसानों के लिए बेहद अच्छा अवसर आने वाला है. देश के पहाड़ी राज्यों में बांस का उपयोग भवन निर्माण सामग्री/निर्माण के रूप में किया जाता है. इसके अलावा जैसे निर्माण, फर्नीचर, कपड़ा, भोजन, ऊर्जा उत्पादन, हर्बल दवा आदि. इसके अलावा बांस से कई और प्रोडक्ट बनाए जा रहे हैं. साथ गही सजावट के सामान, इयरबड्स अन्य उत्पादों को बनाने में बांस की लकड़ी को तरजीह दी जा रही है.

सरकार का उद्देश्य है कि बांस की लकड़ियों के उत्पाद को बढ़ावा देकर प्लास्टिक के सामान से लोगों की निर्भरता कम की जा सके. ऐसे में इसका बाजार आसानी से उपलब्ध है. आने वाले समय में इसका बाजार और बड़ा हो सकता है. बांस आधारित आजीविका और रोजगार को भी बढ़ावा देने पर भी काम किया जा रहा है. सरकार के इस मिशन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फिर जीवित करने और  किसानों की आय को दोगुनी करने के लिए कदम बढ़ाया जा रहा है

 

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