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संजय सिन्हा की कहानी: मुहब्बत की कोशिकाओं से चल रही दुनिया

संजय सिन्हा की कहानी: मुहब्बत की कोशिकाओं से चल रही दुनिया

अगर मैं आपसे कहूं कि आप लोग मुझसे मुहब्बत करते हैं, तो आप क्या कहेंगे? आप यही कहेंगे कि हां, आप संजय सिन्हा से मुहब्बत करते हैं. जानते हैं आप ऐसा क्यों कहेंगे? आप ऐसा इसलिए कहेंगे क्योंकि मैं भी आपसे मुहब्बत करता हूं. ये संसार मुहब्बत की कोशिकाओं से संचालित होता है. जो मुहब्बत करना जानते हैं, वही जीना जानते हैं. बाकी तो पता नहीं किस संसार की कल्पना में जीने का बस उपक्रम भर करते हैं. इस लिहाज़ से मैं बिना फिलासिफी बघारे हुए कह सकता हूं कि हम सब जी रहे हैं. हम सब जी रहे हैं, क्योंकि हम मुहब्बत का अर्थ समझते हैं. सुनिए प्रेम में पगी एक कहानी...

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