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संजय सिन्हा की कहानी : नई शिक्षा ने छीनी बूढ़ों की सामाजिक सुरक्षा

संजय सिन्हा की कहानी : नई शिक्षा ने छीनी बूढ़ों की सामाजिक सुरक्षा

20 साल पहले जो मोहल्ला युवा लोगों की सोसाइटी थी. अब 20 साल बाद उसे मोहल्ले में सन्नाटा पसरा हुआ है, बूढ़े लोगों का मोहल्ला बना हुआ है. क्योंकि युवा पढ़ लिखकर नौकरी करने बाहर चले गए हैं. हमारे बड़े बूढ़े अपने बच्चों को अपना पेट काटकर इसलिए पढ़ाते हैं ताकि वे बड़े होकर अमेरिका में ऊंचे वेतन वाली नौकरी कर सकें. वास्तव में हमारी शिक्षा व्यवस्था ने हमारे बड़े बूढ़ों की एकमात्र सुरक्षा उनके बच्चों को भी छीन लिया है.

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