scorecardresearch
 
साइंस न्यूज़

धरती का सबसे गहरा भूकंप दर्ज किया गया, सतह से 751KM नीचे था केंद्र

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 1/12

आमतौर पर जो भूकंप आते हैं उनकी गहराई 10 से 50 किलोमीटर तक रहती है. लेकिन हाल ही में वैज्ञानिकों ने अब तक का सबसे गहरा भूकंप दर्ज किया है. यह भूकंप धरती के अंदर 751 किलोमीटर की गहराई में आया था. वैज्ञानिक इसे सबसे गहरे भूकंप (Deepest Earthquake) का दर्जा दे रहे हैं. यह धरती के लोअर मैंटल (Lower Mantle) में आया था, जिसे देख वैज्ञानिक हैरान रह गए, क्योंकि इस सतह पर भूकंप बेहद दुर्लभ स्थिति में आते हैं. (फोटोः गेटी)

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 2/12

वैज्ञानिकों ने जब जांच की तो पता चला कि लोअर मैंटल में भूकंप अत्यधिक दबाव की वजह से आया होगा. इसकी वजह पत्थरों की परत में खिंचाव, दबाव या टूट-फूट रही होगी. जिसकी वजह से अचानक से ऊर्जा निकली होगी. यूनिवर्सिटी ऑफ नेवादा में जियोमटेरियल्स की प्रोफेसर पामेला बर्नली ने कहा कि हम मिनरल्स से ऐसे बदलावों की उम्मीद नहीं करते. अगर लोअर मैंटल में कोई दबाव बनता भी है तो वह इतना सघन होता है कि वहां पर भूकंप पैदा होना बेहद दुर्लभ बात है. (फोटोः गेटी)

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 3/12

पामेला ने कहा कि दुनिया के सबसे गहरे भूकंप की जांच चल रही है. स्टडी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ सही अंदाजा लगाया जा सकता है. दुनिया का सबसे गहरा भूकंप रिक्टर पैमाने पर 7.9 तीव्रता का था. उससे पहले हल्के भूकंपों की कई लहरें आई थीं. ये जापान के बोनिन आइलैंड के नीचे था. इसके बारे में जर्नल जियोफिजिल रिसर्च लेटर्स में स्टडी प्रकाशित हुई है. (फोटोः गेटी)

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 4/12

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के भूकंप विज्ञानी एरिक काइसर ने बताया कि जापान के पास भूकंपों को नापने का दुनिया का सबसे बेहतरीन नेटवर्क है. जिसे वो हाई-नेट एरे (Hi-net Array) कहते हैं. वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया के सीस्मोलॉजिस्ट जॉन विडेल कहते हैं कि जापान का यह सिस्टम इस समय धरती पर किसी भी तरह के भूकंप को डिटेक्ट कर सकता है. यह काफी संवेदनशील सिस्टम है. (फोटोः गेटी)

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 5/12

जॉन विडेल कहते हैं कि किसी भी भूंकप की गहराई नापने के लिए हमें अब भी बेहद संवेदनशील और अत्याधुनिक यंत्र की जरूरत है. क्योंकि भूकंप की गहराई का अनुमान लगाया जाता है. लेकिन जहां तक बात रही सबसे गहरे भूकंप की तो इस बार उनका अनुमान सही है. यह भूकंप धरती की सतह से 751 किलोमीटर नीचे लोअर मैंटल में आया था. उनके निष्कर्ष अब भी पुख्ता डेटा पर आधारित हैं. (फोटोः गेटी)

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 6/12

आमतौर पर आने वाले भूकंप काफी छिछले होते हैं. यानी इनकी गहराई ज्यादा नहीं होती. ये धरती के क्रस्ट (Crust) यानी ऊपरी सतह में पैदा होते हैं. ये बहुत नीचे गए तो अपर मैंटल (Upper Mantle) तक यानी सतह से 100 किलोमीटर नीचे तक. ज्यादातर भूकंप धरती के क्रस्ट में 20 किलोमीटर गहराई तक के होते हैं. क्योंकि यहां पर पत्थरों की परतें आपस में टकराती, खिंचती या एकदूसरे को दबाती हैं. इसकी वजह से कंपन पैदा होता है. (फोटोः गेटी)

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 7/12

पामेला बर्नली ने कहा कि क्रस्ट के नीचे और लोअर मैंटल तक पत्थर गर्म होते हैं. ये काफी ज्यादा दबाव में रहते हैं. इसलिए इनके टूटने का खतरा कम होता है. इस गहराई में न तो ये आपस में टकराते हैं, न ही किसी तरह का दबाव या खिंचाव पैदा करते हैं. इसलिए इतनी गहराई में भूकंपों का आना अत्यधिक दुर्लभ माना जाता है. हां एक बात जरूर होती है कि अगर पत्थरों के बीच में दरार या गैप बनता है तो उसमें गर्म तरल मैग्मा प्रवेश करने लगता है, जिससे भी कंपन महसूस हो सकती है. (फोटोः गेटी) 

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 8/12

पामेला कहती हैं कि आमतौर पर अभी तक सबसे गहरा भूकंप 400 किलोमीटर नीचे यानी अपर मैंटल तक ही दर्ज हुआ था. इससे गहरा 670 किलोमीटर नीचे आया भूकंप भी जापान के नीचे ही दर्ज किया गया था, लेकिन वो हल्की तीव्रता का था. पर 750 किलोमीटर नीचे किसी भूकंप का आना एक दुर्लभ गतिविधि है. वह भी 7.9 तीव्रता का. इसका मतलब इस गहराई में पत्थरों की परत के बीच पानी या किसी तरल पदार्थ का तेज बहाव हुआ है. (फोटोः गेटी)

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 9/12

आपको बता दें कि धरती के लोअर मैंटल का ज्यादातर हिस्सा ओलिविन (Olivine) नाम के मिनरल से बना है. ये चमकदार हरे रंग का होता है. 400 किलोमीटर के नीचे ओलिविन के एटम खुद को रीअरेंज करने लगते हैं. ये अपना आकार बदलना शुरु कर देते हैं. फिर ये नीले रंग के मिनरल में बदल जाते हैं, जिसे वैडस्लाइट (Wadsleyite) कहते हैं. आखिरकार 680 किलोमीटर की गहराई में रिंगवुडाइट (Ringwoodite) दो मिनरल्स में टूटकर ब्रिजमैनाइट (Bridgmanite) और पेरीक्लेस (Periclase) में बदल जाता है. (फोटोः गेटी)

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 10/12

समस्या ये है कि इन मिनरल्स के बीच से गुजरने वाली भूकंपीय लहरें भी अपनी दिशा और दशा बदलती रहती है. कभी तीव्र हो जाती हैं तो कभी कमजोर. इसलिए वैज्ञानिक इसके पीछे की वजह आजतक खोज नहीं पाए हैं. धरती के ऊपरी हिस्से में ग्रेफाइट सबसे ज्यादा पाया जाता है. ये नरम, ग्रे और चिकने होते हैं. वहीं हीरे मजबूत और पारदर्शी होते हैं. यहां पर भूकंपीय लहरों का असर पता चलता है. ओलिविन सिर्फ बहुत ज्यादा प्रेशर में अपना आकार बदलता है, लेकिन धरती के ऊपरी हिस्से में हल्के प्रेशर से भी भूकंप आता है. (फोटोः गेटी)

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 11/12

बोनिन भूकंप (Bonin Earthquake) 751 किलोमीटर नीचे पैदा हुआ. यह जगह लोअर मैंटल में एक चौकोर सा हिस्सा है. इसलिए यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि अपर और लोअर मैंटल की सीमा वहां न हो जहां पर वैज्ञानिक सोच रहे थे. क्योंकि किसी सीमा या परत के बीच के हिस्से में भूकंप आने की आशंका ज्यादा रहती है. बोनिन आइलैंड एक सबडक्शन जोन के ऊपर है. उसके नीचे समुद्री क्रस्ट की एक परत है जो महाद्वपीय क्रस्ट के ऊपर टिका हुआ है. जब नीचे की परत में कोई हलचल होती है, तो समुद्री क्रस्ट हिलता है, भूकंप आता है. फिर सुनामी आने लगती है. (फोटोः गेटी)

Deepest Earthquake 751KM Below
  • 12/12

यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया की जियोफिजिसिस्ट हीदी ह्यूस्टन कहती हैं कि जहां पर भूकंप आया वो बेहद जटिल जगह है. हमें नहीं पता कि वहां पर लोअर और अपर मैंटल की सीमा है या नहीं. ये बात तो तय है कि 751 किलोमीटर नीचे अगर 7.9 तीव्रता का भूकंप आया है तो वहां पर किसी तरह की बड़ी हलचल हुई है. इसलिए इसका अध्ययन करना बेहद जरूरी है. (फोटोः गेटी)