ज्योतिष में जल को बहुत चमत्कारी तत्व माना गया है. जल, सकारात्मक और नकारात्मक , दोनों ऊर्जाओं को सोख सकता है. इसीलिए जल को मंत्र से अभिमंत्रित करने की क्रिया की जाती है. शरीर का जल तत्त्व ही आपको शक्तिशाली और दिव्य बना सकता है. जल के प्रयोग से वास्तविक और काल्पनिक दोनों समस्याएं दूर की जा सकती हैं. जीवन में जल का सही और संतुलित प्रयोग आपको स्वस्थ और विषमुक्त रखता है. यह भावनाओं को बहने से नियंत्रित करता है और आपको आध्यात्मिक बनाता है. जल के चमत्कारी प्रयोग करने के लिए आपको लोटे प्रयोग करना चाहिये
गिलास के जल और लोटे के जल में क्या अंतर है?
गिलास एक रेखीय आकृति का होता है जबकि लोटा गोलाकार होता है. एक रेखीय आकृति का सतह तनाव ज्यादा होता है जबकि गोलाकार आकृतियों का सरफेस टेंशन कम होता है. जिन बर्तनों का सरफेस टेंशन ज्यादा होता है उनका जल नुकसान करता है. जबकि जिन बर्तनों का सरफेस टेंशन कम होता है, उनका ही जल लाभकारी होता है. इसलिए पूजा उपासना और पीने के लिये लोटे का पानी सर्वश्रेष्ठ है.
अगर आपके घर में कलह कलेश, बीमारियां रहती हों
एक ताम्बे के लोटे में जल भरकर सामने रखें. इसमें जरा सी सुगंध मिला लें. अब बोल बोलकर 108 बार गायत्री मन्त्र का जप करें. जप के पांच मिनट तक जल का स्पर्श न करें. इसके बाद पूरे घर में इस जल का छिड़काव करें. बचा हुआ जल पौधों में डाल दें.
अगर किसी का स्वास्थ्य काफी दिन से खराब हो
ताम्बे के लोटे में जल भर लें. इसको अपने हाथ में ले लें. अब आप लघु मृत्युंजय मन्त्र पढ़ते जाइये और जल में फूंक मारते जाइये. पांच मिनट के बाद उस जल को रोगी को पिला दीजिये. ये प्रयोग रोज शाम को करें तो उत्तम होगा.
जल के जादुई प्रयोग
पानी, जहां तक हो सके लोटे से ही पीयें. सूर्य को लोटे से ही जल अर्पित करें. एक लोटा जल भरकर अपने पूजा स्थान पर जरूर रखें.