अब गणपति भी अपने स्वरूप की तरह ही ग्लोबल हो गए हैं, तभी तो मुंबई के जगतप्रसिद्ध लालबाग के राजा अब दिल्ली भी आने लगे हैं. उत्तरी दिल्ली के पीतमपुरा में पूरे 11 दिन लाल बाग के राजा भक्तों के बीच रहते हैं. मुंबई में लालबाग के राजा के दर्शन के लिए घंटों कतार में रहना पड़ता है लेकिन यहां गणराजा के दर्शन मिनटों में होते हैं. वो भी वातानुकूलित भव्य पंडाल में.
वही स्वरूप, वही ठसक, आशीर्वाद की वही अदा और वैसा ही ऐश्वर्य. मुंबई के जगविख्यात लालबाग के राजा दिल्ली में भी पधारे. उत्तरी दिल्ली के इस भव्य पंडाल में जहां सर्दी गर्मी का नहीं बल्कि सिर्फ भक्ति का अहसास होता है. एसी पंडाल में गणपति की भक्ति के साथ भागवत की रसधार भी बहती है. एक और भगवान दूसरी ओर भागवत और सामने भक्त और उनकी भक्ति.
लालबाग का राजा ट्रस्ट के चेयरमैन राकेश बिंदल के मुताबिक, यहां की गणपति प्रतिमा भी मुंबई के वही मूर्तिकार बनाते हैं जो लालबागचा राजा को तैयार करते हैं. वर्षों पहले हम कुछ मित्र बॉम्बे गए थे, लालबाग चा राजा गणपति के दर्शन किए. तभी ये लालसा बस गई कि दिल्ली मे भी इनको लाना है. अब पिछले चार साल से राजा पधार रहे हैं.
करीब साढ़े चार करोड़ की लागत वाला ये आयोजन अपने आप में अजूबा इस मायने में है कि सारी रकम बिना किसी चंदे के जुटाई जाती है. ट्रस्ट के ट्रस्टी ही आपसदारी में ही इतनी बड़ी रकम जुटा लेते हैं.
ट्रस्ट के महासचिव अनिल वाधवा के मुताबिक ये सब गणपति की कृपा है. हम आपस में ही चंदा करते हैं. बाहर से नहीं. रोजाना पांच से दस हज़ार भक्तों का भण्डारा भोजन होता है पंडाल में. बॉलीवुड और टीवी के मशहूर कलाकार जैसे सुनील ग्रोवर, ऋचा शर्मा और कई बड़े कलाकार मंच पर आते हैं और श्रद्धालुओं का मनोरंजन भी करते हैं.
पंडाल के एक हिस्से में भक्ति रस तो दूसरे हिस्से में रसना यानी भोजन का रस मौजूद है. पुरानी दिल्ली के मशहूर व्यंजन भक्ति रस को ज्यादा जायकेदार बना देते हैं. पंडाल के अंदर गणपति की आराधना के साथ साथ गोस्वामी मृदुल कृष्ण शास्त्री भागवत कथा की धारा भी बहा रहे हैं. लेकिन कथा के बाद इसी मंच पर सांस्कृतिक आयोजनों में भजन, संगीत और हास्य व्यंग्य की त्रिवेणी भी बहने लगती है.