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मां कात्यायनी को पसंद है शहद, जानें बीजमंत्र

कात्यायनी की पूजा कैसे करें और क्या है मां को प्रसन्न करने का मंत्र?

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कात्यायनी पूजा
कात्यायनी पूजा

मां दुर्गा की छठी विभूति हैं मां कात्यायनी. शास्त्रों के अनुसार कात्यायन ऋषि के तप से प्रसन्न होकर मां आदि शाक्ति ऋषि कात्यायन की पुत्री के रूप में अवतरित हुई. ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण माता कात्यायनी कहलाती हैं.

शास्त्रों के मुताबिक जो भक्त दुर्गा मां की छठी विभूति कात्यायनी की आराधना करते हैं मां की कृपा उन पर सैदव बनी रहती है. ऐसी मान्यता है कि कात्यायनी माता का व्रत और उनकी पूजा करने से कुंवारी कन्याओं के विवाह में आने वाली बाधा दूर होती है

मां कात्यायनी को पसंद है शहद

मां कात्यायनी ने देवताओं की प्रार्थना सुनकर महिषासुर से युद्ध किया. महिसासुर से युद्ध करते हुए मां जब थक गई तब उन्होंने शहद युक्त पान खाया. शहद युक्त पान खाने से मां कात्यायनी की थकान दूर हो गयी और महिषासुर का वध कर दिया. कात्यायनी की साधना एवं भक्ति करने वालों को मां की प्रसन्नता के लिए शहद युक्त पान अर्पित करना चाहिए.

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पांच प्रकार की मिठाई

मां कात्यायनी की साधना का समय गोधूली काल है. मान्यता है कि इस समय में धूप, दीप, गुग्गुल से मां की पूजा करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती है. जो भक्त माता को पांच तरह की मिठाईयों का भोग लगाकर कुंवारी कन्याओं में प्रसाद बांटते हैं माता उनकी आय में आने वाली बाधा को दूर करती हैं और व्यक्ति अपनी मेहनत और योग्यता के अनुसार धन अर्जित करने में सफल होता है.

माँ शक्ति के नवदुर्गा स्वरूपों में माँ कात्यायनी देवी को छटा रूप माना गया है. माँ कात्यायनी देवी के आशीर्वाद से विवाह के योग बनते है साथ ही वैवाहिक जीवन में भी खुशियाँ प्राप्त होती हैं. आइए जानते हैं मां कात्यायनी देवी के प्रभावशाली मंत्र के विषय में-

|| ॐ ह्रीं क्लीं कात्यायने नमः ||

माँ कात्यायनी मंत्र जप विधि-

पूर्व दिशा की तरफ एक चौकी पर माँ कात्यायनी देवी की फोटो की स्थापना करें. सामने एक घी का दीपक प्रज्वल्लित करें और धूप आदि लगाएं. एक लौटा जल का भरकर रखें. अब एक आसन बिछाकर सामने बैठ जाएं. दायें हाथ में जल लेकर संकल्प लें. संकल्प इस प्रकार लें: – हे परमपिता परमेश्वर मैं (अपना नाम बोले ) गोत्र(अपना गोत्र बोले) अपने शीघ्र विवाह के लिए माँ कात्यायनी देवी के इस मंत्र का जप कर रहा हूँ इसमें मुझे सफलता प्रदान करें, ऐसा कहते हुए जल को नीचे जमीन पर छोड़ दे और बोले ॐ श्री विष्णवे नमः – ॐ श्री विष्णवे नमः – ॐ श्री विष्णवे नमः.

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संकल्प लेने के पश्चात् एक माला अपने गुरु के नाम से जपे, फिर एक माला – ॐ श्री गणेशाय नमः इस मंत्र की जपे. इसके बाद माँ कात्यायनी देवी के उपरोक्त मन्त्र की कम से कम 3 माला या फिर इससे अधिक आप जितना भी जप कर सके, मंत्र जप करें. मंत्र जप के पश्चात् फिर से हाथ में जल लेकर इस प्रकार बोले – हे परमपिता, मैंने ये शीघ्र विवाह के लिए माँ कात्यायनी देवी के यह जो मन्त्र जप किये है इन्हें मैं अपने कार्य की पूर्णता हेतु श्री ब्रह्म को अर्पित करता हूं, ऐसा कहते हुए हाथ के जल को नीचे जमीन पर छोड़ दें. अब फिर से 3 बार बोले ॐ श्री विष्णवे नमः. अब आप अपना आसन का एक कोना थोड़ा मोड़ कर खड़े हो जाएं.

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