Shardiye Navratri 2023: नवरात्रि के दो दिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं- अष्टमी और नवमी. आज शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि है. इस दिन माता महागौरी की उपासना की जाती है. बहुत सारे लोग विशेष उपवास भी रखते हैं. इसके अलावा, इस दिन कन्या पूजन का भी प्रावधान है. नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर उपासना से विवाह का वरदान मिलता है. आइए आपको महागौरी की पूजन विधि और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त बताते हैं.
महागौरी की पूजा विधि
सुबह सन्नादि के बाद पीले वस्त्र धारण करके पूजा आरम्भ करें. मां के समक्ष दीपक जलाएं और उनका ध्यान करें. पूजा में मां को श्वेत या पीले फूल अर्पित करें. मां को मोगरे और रातरानी का पुष्प अत्यन्त प्रिय है. इसके बाद देवी मां को हलवा और काले चने का भोग लगाएं. फिर देवी मां के मंत्रों का जाप करें.
अष्टमी कन्या पूजन का मुहूर्त
महाअष्टमी पर कन्या पूजन भी किया जाता है. आज कन्या पूजन के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं. पहला मुहूर्त सुबह 7 बजकर 51 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगा. फिर 9 बजकर 16 मिनट से लेकर 10 बजकर 41 मिनट तक दूसरा मुहूर्त रहेगा. ये दोनों ही शुभ मुहूर्त सर्वार्थ सिद्धि योग में लगेंगे.
अष्टमी पर कन्या पूजन का महत्व
नवरात्रि केवल व्रत और उपवास का पर्व नहीं है. यह नारी शक्ति के और कन्याओं के सम्मान का भी पर्व है. इसलिए नवरात्रि में कुंवारी कन्याओं को पूजने और भोजन कराने की परंपरा भी है. वैसे तो नवरात्रि में हर दिन कन्याओं के पूजा की परंपरा है, लेकिन अष्टमी और नवमी को अवश्य ही इनकी पूजा की जाती है. इसमें 2 वर्ष से लेकर 11 वर्ष तक की कन्या की पूजा का विधान किया गया है.
कन्या पूजन की विधि
नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर कन्याओं को उनके घर जाकर निमंत्रण दें. गृह प्रवेश पर कन्याओं का पूरे परिवार के साथ पुष्प वर्षा से स्वागत करें और नव दुर्गा के सभी नामों के जयकारे लगाएं. अब इन कन्याओं को आरामदायक और स्वच्छ जगह पर बिठाएं. सभी के पैरों को दूध से भरे थाल में रखकर अपने हाथों से धोएं.
इसके बाद कन्याओं के माथे पर अक्षत, फूल या कुमकुम लगाएं फिर मां भगवती का ध्यान करके इन देवी रूपी कन्याओं को इच्छा अनुसार भोजन कराएं. भोजन के बाद कन्याओं को अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा, उपहार दें और उनके पैर छूकर आशीष लें.
अष्टमी पर महागौरी के मंत्र
1. ॐ ह्रीं गौर्ये नमः
2. हे गौरीशंकर अर्धांगी, यथा त्वाम शंकर प्रिया।
3. माम कुरु कल्याणी, कान्त कान्ता सुदुर्लभाम।।