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पितृ पक्ष में मां लक्ष्मी का पूजन, नौकरीपेशा-कारोबारियों को होंगे लाभ

ऐसी मान्यता है कि मां लक्ष्मी का जन्म समुद्र में हुआ था और इन्होंने श्री विष्णु से विवाह किया था. इनकी पूजा से धन की प्राप्ति होती है साथ ही वैभव भी मिलता है.

अगर लक्ष्मी रुष्ट हो जाएं तो घोर दरिद्रता का सामना करना पड़ता है. अगर लक्ष्मी रुष्ट हो जाएं तो घोर दरिद्रता का सामना करना पड़ता है.

किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने पर भोज का आयोजन करना उचित नहीं है. इसके स्थान पर आप यथाशक्ति अन्न या वस्त्र का दान कर सकते हैं. कौन हैं मां लक्ष्मी और इनकी महिमा क्या है? धन और संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं मां लक्ष्मी. माना जाता है समुद्र से इनका जन्म हुआ था और इन्होंने श्री विष्णु से विवाह किया था. इनकी पूजा से धन की प्राप्ति होती है साथ ही वैभव भी मिलता है. अगर लक्ष्मी रुष्ट हो जाएं तो घोर दरिद्रता का सामना करना पड़ता है. ज्योतिष में शुक्र ग्रह से इनका सम्बन्ध जोड़ा जाता है.

इनकी पूजा से किन फलों की प्राप्ति होती है?

- इनकी पूजा से केवल धन ही नहीं बल्कि नाम यश भी मिलता है.

- इनकी उपासना से दाम्पत्य जीवन भी बेहतर होता है.

- कितनी भी धन की समस्या हो अगर विधिवत लक्ष्मी जी की पूजा की जाय तो धन मिलता ही है.

- पितृ पक्ष में भी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है जिससे पितरों के अलावा मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त हो सकती है.

- इस बार पितृ पक्ष में मां लक्ष्मी की उपासना 21 सितम्बर को की जायेगी.

पितृ पक्ष में मां लक्ष्मी की पूजा की विशेष सावधानियां क्या हैं?

- मां लक्ष्मी की पूजा वही लोग कर सकते हैं जिनके माता-पिता जीवित हों.

- अगर श्राद्ध में नियमों का पालन कर रहे हों तो मां लक्ष्मी की पूजा का प्रयोग न करें.

- ये प्रयोग घर या परिवार का कोई भी सदस्य कर सकता है , बशर्ते कि उसके माता-पिता जीवित हों.

मां लक्ष्मी की कृपा पाने के विशेष प्रयोग

पहला प्रयोग (जो लोग व्यवसाय करते हैं)

- व्यवसाय के स्थान पर लक्ष्मी जी, गणेश जी और विष्णु जी की स्थापना करें.

- लक्ष्मी जी के दाहिनी ओर विष्णु जी को और बाएं ओर गणेश जी को स्थापित करें.

- नित्य प्रातः काम शुरू करने के पहले उनको एक गुलाब का फूल चढाएं.

- घी का दीपक और गुलाब की सुगंध वाली धूप जलाएं.

दूसरा प्रयोग (जो लोग नौकरी करते हैं)

- पूजा के स्थान पर कमल के फूल पर बैठी हुई लक्ष्मी जी के चित्र की स्थापना करें.

- इस चित्र में अगर दोनों तरफ से हाथी सूंढ़ में भरकर जल गिरा रहे हों तो और भी उत्तम होगा.

- इस चित्र के सामने सायंकाल घी का दीपक जलाएं और मां को इत्र अर्पित करें.

- रोज शाम पूजा की समाप्ति के बाद तीन बार शंख जरूर बजाएं.

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