लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई से ईरान भड़क गया है. उसने अमेरिका से बातचीत बंद कर दी है और इजरायल को धमकाया है कि अगर उसने हिज्बुल्लाह पर हमला नहीं रोका तो उत्तरी इजरायल के कई शहर दहल जाएंगे. ईरानी न्यूज एजेंसी तसनीम न्यूज ने कहा है कि तेहरान की बातचीत करने वाली टीम लेबनान पर हुए हमलों के कारण मध्यस्थों के ज़रिए अमेरिका के साथ संदेशों का आदान-प्रदान रोक रही है. देखें रणभूमि.
ईरान ने आज अपने हमले से कुवैत की नींद उड़ा दी. ईरान ने सवेरा होते ही कुवैत में अमेरिकी अड्डे को निशाना बनाया. कुवैत ने कहा कि उसके एयर डिफेंस ने ड्रोन और मिसाइलों को रोकने के लिए इंटरसेप्टर फायर किए. ईरान के हमले को नाकाम कर दिया गया. ईरान की ओर से दागी गई मिसाइल को कैमरे में कैद किया गया है.
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर जारी कूटनीतिक प्रयासों के बीच व्हाइट हाउस में हुई अहम बैठक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वरिष्ठ सलाहकारों और शीर्ष अधिकारियों के साथ करीब दो घंटे तक गहन चर्चा की, लेकिन बैठक के बाद कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया. दूसरी तरफ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार होर्मुज में अमेरिकी सेना बारूदी सुरंग को नहीं ढूंढ पायी. फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीतिक गतिविधियां जारी हैं.
अगर अमेरिका और ईरान डील के इतने ही करीब हैं तो दोनों के सुर अलग अलग क्यों हैं. आखिर क्यों अमेरिका लगातार कह रहा है कि वो समझौते के बेहद करीब है जबकि ईरान आधिकारिक तौर पर इस पर चुप्पी साधे हुए है. इतना ही नहीं, अमेरिका इस बीच ईरान को डील ना होने की सूरत में नतीजा भुगतने की धमकी भी दे रहा है. क्या समझौते की शर्तें छिपाई जा रही हैं या फिर समझौते का सस्पेंस कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है.
क तरफ युद्ध विराम है तो दूसरी तरफ उसका उल्लंघन भी. एक तरफ शांति की कोशिशें हैं तो दूसरी तरफ मिसाइलों की मार भी. एक तरफ होर्मुज का सस्पेंस हैं तो दूसरी तरफ परमाणु की उलझनें भी. इन सबके बीच पूरी दुनिया की निगाह इस पर है कि क्या युद्धविराम बढ़ेगा या फिर अमेरिका और ईरान के बीच घमासान होने वाला है.
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरान से जुड़े संदिग्ध ठिकानों पर नए हमले किए हैं. बताया जा रहा है कि ये ठिकाने अमेरिकी सेना और व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा माने जा रहे थे. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार चार ईरानी ड्रोन भी मार गिराए गए, जबकि बंदर अब्बास स्थित एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को भी निशाना बनाया गया. दावा है कि वहां से अतिरिक्त ड्रोन उड़ाने की तैयारी चल रही थी. इस कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
पाकिस्तान को उसकी औकात अमेरिका के साथ-साथ उसके पाले आतंकियों ने भी याद दिलाई है. दरअसल, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सुलह कराने के लिए शांति का मसीहा बन रहे पाकिस्तान के सामने राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल से दोस्ती का प्रस्ताव रख दिया गया है. डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई अरब और मुस्लिम देशों से कहा है कि वो अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होकर इजरायल को मान्यता दें.
नए महायुद्ध की कगार पर खड़ा मध्य-पूर्व कल रात एक बार फिर दहल उठा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दक्षिणी ईरान के बंदरअब्बास में मिसाइल लॉन्च साइट के अलावा होर्मुज में माइन्स बिछाने जा रही बोट्स पर जोरदार हमला किया. ये हमला उस वक्त हुआ जब ईरान के वार्ताकार कुछ ही घंटे पहले कतर पहुंचे थे जहां युद्ध बंद करने को लेकर बातचीत चल रही है.
ईरान और अमेरिका में बढ़ते तनाव के बीच ईरानी सुप्रीम लीडर के नियंत्रण वाले अखबार कायहान ने फ्रंट पेज पर अमेरिका को चेतावनी दी है और कहा है कि कोई भी डील ईरान के सुप्रीम लीडर के शर्तों पर ही होगी. रिपोर्ट्स के अनुसार, अखबार ने संकेत दिया है कि किसी भी संभावित शांति वार्ता या समझौते को केवल ईरानी नेतृत्व की शर्तों और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप ही स्वीकार किया जाएगा. इसके साथ ही अमेरिका की नीतियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी तीखी टिप्पणी की गई, जिससे दोनों देशों के बीच जारी तनाव और कूटनीतिक टकराव और बढ़ने की आशंका है.
करीब 90 दिन के बाद ही सही, लेकिन धीरे धीरे ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध और संघर्ष की खबरों के बीच शुभ संकेत मिलने शुरू हो गए. खबरों के मुताबिक अगले 30 दिनों में हालात समान्य हो सकते है. अमेरिका और ईरान के बीच किसी बड़ी डील का ऐलान किया जा सकता है. लेकिन इन शुभ संकेतों के बीच परेशानी का सबब अब भी वही बिंदू है जिसकों लेकर दोनों ताकते तस से मस नहीं हो रही. यानी युरेनियम किसके कब्जे में रहेगा.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दिल्ली में पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है. इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने पीएम मोदी को व्हाइट हाउस आने का न्यौता भी दिया. बैठक में सुरक्षा, व्यापार, नई तकनीक और रणनीतिक साझेदारी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ. मार्को रुबियो का यह पहला भारत दौरा है, जिसमें वह कोलकाता, जयपुर और आगरा जैसे प्रमुख शहरों का भी दौरा करेंगे.
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी नए महायुद्ध का अलार्म बजाती दिख रही है. दोनों देशों के बीच टकराव के दो सबसे बड़े मुद्दे सामने आ रहे हैं. पहला मुद्दा ईरान में मौजूद 400 किलो यूरेनियम का है जो वेपन ग्रेड से बस एक कदम दूर है. टकराव का दूसरा मुद्दा होर्मुज है जिससे टोल वसूलने पर ईरान अड़ा हुआ है. देखें रणभूमि.
आज शाम 5 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. इस बैठक में सरकार के अगले 3 सालों के साथ साथ, विजन 2029 तक पर मंथन होगा. करीब 11 महीने बाद हो रही इस महाबैठक को लेकर कूटनीतिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. एक तरफ जहां मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें लगाई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम एशिया के युद्ध के बीच सरकार बड़े सुधारों का खाका खींचने जा रही है.
प्रधानमंत्री अपने विदेश दौर के आखिरी चरण में इटली का दौरा कर रहे हैं. अब से कुछ देर पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजकीय स्वागत किया गया. उन्हेें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. वहीं इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से उनकी द्विपक्षीय बातचीत भी हुई. लेकिन आज सबसे बड़ी चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी की मुलाकात को लेकर हो रही है.
वॉशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कल ये ऐलान कर सबको चौंका दिया कि वो ईरान पर हमले का फैसला कर चुके थे लेकिन उन्होंने फैसला टाल दिया. ट्रंप ने कहा कि वो ईरान पर हमले का फैसला कर चुके थे लेकिन खाड़ी के कुछ देशों- UAE, कतर, सऊदी अरब के कहने पर उन्होंने आखिरी समय पर उसे टाल दिया. अब आज ट्रंप की बड़ी बैठक है, जिसमें नई रणनीति बनेगी. देखें रणभूमि