स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय टैंकरों को बीच रास्ते से लौटना पड़ा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा फायरिंग और सुरक्षा अनिश्चितता के कारण जहाजों ने रास्ता बदल लिया. इस दौरान कुछ अन्य वाणिज्यिक जहाजों पर भी गोलीबारी की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
7 अप्रैल को ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्धविराम हुआ था. दो हफ्ते के इस युद्धविराम के महज 5 दिन बाकी हैं लेकिन ईरान-अमेरिका के बीच अगले दौर की बातचीत कब होगी ये साफ नहीं है. ट्रंप के हुक्म पर उनका संदेश लेकर पाकिस्तान के आर्मी चीफ कल तेहरान पहुंचे. साथ में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी थे. दूसरी तरफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब पहुंचे. उन्होंने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात की. उनके मदीना जाने की तस्वीरें भी आई हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुनीर और शहबाज को ईरान और दूसरे मुस्लिम देशों से बात करने के लिए चुना है. वो उनकी पीठ भी थपथपा रहे हैं. लेकिन जिस समय आसिम मुनीर ईरान में मौजूद थे, उसी समय ईरान के विदेश मंत्री ने धमकी दे दी कि होर्मुज की नाकाबंदी के गंभीर नतीजे हो सकते हैं. अब तक ईरान की तरफ से ये साफ नहीं किया गया है कि आसिम मुनीर के जरिए मिले अमेरिकी प्रस्ताव क्या हैं और उन पर उसका क्या रुख है? यही नहीं, अब तक उसने अगले दौर की बातचीत की तारीख को लेकर भी कुछ नहीं कहा है.
2026 की सबसे बड़ी डिप्लोमैटिक हलचल अब एक निर्णायक मोड़ पर है. राष्ट्रपति ट्रंप ने बड़ा दावा किया है. वो कह रहे हैं कि ईरान युद्ध अब खत्म होने के करीब है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि उन्हें युद्धविराम बढ़ाने की जरूरत नहीं लगती क्योंकि ईरान समझौते के लिए बेचैन है. उधर, पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 'राउंड-2' की तैयारी शुरू हो चुकी है. ट्रंप ने कहा है एक-दो दिन में पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत होगी. शहबाज शरीफ रियाद और अंकारा की दौड़ लगा रहे हैं ताकि मुस्लिम देशों का समर्थन जुटा सकें.
आज 'रणभूमि' में बात उस खतरे की जिसने पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं. क्या हम तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़े हैं? क्या हॉर्मुज की लहरें अब बारूद से दहकने वाली हैं? ये सवाल इसलिए, क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz में इस वक्त 'महायुद्ध' का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. एक तरफ अमेरिका के विध्वंसक युद्धपोत हैं, तो दूसरी तरफ ईरान की IRGC नेवी, जो रेडियो पर सीधी चेतावनी दे रही है- '30 मिनट में टारगेट कर देंगे'. लेकिन खेल सिर्फ अमेरिका और ईरान का नहीं है. इस पूरी बिसात के पीछे असली निशाना है- चीन. ट्रंप ने हॉर्मुज की घेराबंदी कर चीन की 'एनर्जी लाइफलाइन' पर हाथ डाल दिया है. ईरान का तेल रुकने का मतलब है चीन की अर्थव्यवस्था का ब्लैकआउट! और इधर व्लादिमीर पुतिन की एंट्री ने साफ कर दिया है कि मामला अब हाथ से निकल चुका है. क्या चीन अपने तेल के लिए अमेरिका से सीधे टकराएगा? क्या ट्रंप की 'Loaded and Locked' वाली धमकी दुनिया को जलाकर राख कर देगी?
इस वक्त पूरी दुनिया की नजर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं क्योंकि वहीं से संदेश आने वाला है कि पश्चिम एशिया में शांति कायम होगी या फिर भड़केगी युद्ध की ज्वाला. फिलहाल इस्लामाबाद से अपडेट ये है कि कुछ देर पहले ही अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ से बात की हैै. माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद अमेरिकी दल और ईरानी दल की आमने सामने बात हो सकती है. शहबाज से मुलाकात में वेंस पहले अमेरिका का पक्ष रखेंगे.
दशकों के तनाव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच 11 अप्रैल को प्रस्तावित ऐतिहासिक वार्ता से पहले इस्लामाबाद को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है. पाकिस्तान ने रेड ज़ोन को पूरी तरह सील कर दिया है, जहां संसद से लेकर प्रधानमंत्री आवास तक भारी सुरक्षा बल तैनात हैं और आम नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है. सुरक्षा व्यवस्था जमीन के साथ-साथ आसमान में भी कड़ी कर दी गई है, जहां पाकिस्तानी वायुसेना के विशेष विमान और फाइटर जेट्स लगातार निगरानी कर रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान की सुरक्षा के लिए फाइटर जेट्स को बंदर अब्बास तक भेजा गया है, ताकि किसी संभावित हमले के खतरे को टाला जा सके.
करीब 40 दिनों तक चले भीषण तनाव और हमलों के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बन गई है, जो फिलहाल दो हफ्तों के लिए लागू रहेगा. इस सीजफायर के पीछे पर्दे के पीछे चली कूटनीतिक कोशिशों में कई देशों की भूमिका बताई जा रही है, जिसमें पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता की चर्चा भी शामिल है. युद्धविराम से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी धमकियां दी थीं, लेकिन हालात तेजी से बदले और दोनों पक्ष समझौते पर पहुंच गए। खास बात यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और ईरान के कड़े रुख ने इस समझौते में अहम भूमिका निभाई, जिससे क्षेत्रीय तनाव फिलहाल कम होने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि इजरायल के लेबनान पर तोबड़तोड़ हमले से इस युद्ध विराम पर सवाल खड़े होने लगे हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिन से जारी जंग के बाद आखिरकार 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बन गई. सीजफायर से पहले ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित रास्ता नहीं मिला तो वो उसकी पूरी सभ्यता खत्म कर देंगे. अमेरिकी लड़ाकू विमान और मिसाइलें स्टैंडबाय पर थीं. पूरी दुनिया सांस रोके 'महाविनाश' का इंतजार कर रही थी. भारतीय समय सुबह 4:30 बजे, यानी डेडलाइन से 1 घंटा पहले बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हुई. उस वक्त अमेरिका में रात के 7 बजे थे और डोनाल्ड ट्रंप की डेडलाइन में सिर्फ 60 मिनट बचे थे. खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी मिसाइलें 'लॉन्च मोड' पर थीं. भारतीय समय सुबह पौने 5 बजे से लेकर सवा 5 बजे के बीच पाकिस्तान के आर्मी चीफ और पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप को फोन कर युद्ध टालने और ईरान का 'प्रस्ताव' सुनने की आखिरी अपील की. सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर यानी डेडलाइन खत्म होने से ठीक 10 मिनट पहले ट्रंप ने दुनिया को चौंका दिया. उन्होंने पोस्ट किया कि पाकिस्तान के अनुरोध पर और ईरान के 10-सूत्रीय एजेंडे के आधार पर वो दो हफ्ते के लिए हमले रोक रहे हैं.
बुलेटिन की शुरुआत तुर्किए के इस्तांबुल से आ रही बड़ी खबर से करते हैं. इस्तांबुल में इजरायली कान्सुलेट के पास अंधाधुंध फायरिंग हुई है. इस हमले में तीन लोग मारे गए हैं. ईरान युद्ध के बीच हुए इस हमले की तस्वीरें बता रही हैं कि हमलावरों और सुरक्षाकर्मियों के बीच किस तरह गोलीबारी चल रही है. सुरक्षा एजेंसियों की गाड़ियों के सायरन बज रहे हैं. सड़क पर आमने-सामने फायरिंग चल रही है. आपको बता दें कि इस वक्त इस्तांबुल में इजरायल का एक भी राजनयिक नहीं है. तुर्किए के मुताबिक करीब ढाई साल से कॉन्सुलेट में इजरायल का कोई भी डिप्लोटमैट मौजूद नहीं है. इसके बावजूद ये हमला हुआ है. तुर्किए के जस्टिस मिनिस्टर के मुताबिक तीन अधिकारी इस हमले की जांच करेंगे. रॉयटर्स और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हमले में 3 लोगों की मौत हुई है जबकि 2 पुलिस अधिकारी भी गंभीर रूप से घायल हैं. मुठभेड़ के बाद पूरे इलाके को छावनी में तब्दील किया गया है.
मिडिल-ईस्ट में बढ़ते टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए साफ कर दिया है कि अगर 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका बड़े स्तर पर हमले करेगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के पावर प्लांट्स, पुलों और अन्य अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है. अब उनके इस ब्लैक वेडनसडे प्लान को लेकर पूरी दुनिया परेशान है. यह बयान ऐसे समय आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है और वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ रहा है. वहीं ईरान ने इस दबाव को खारिज करते हुए संकेत दिए हैं कि वह दबाव में कोई फैसला नहीं करेगा, जिससे क्षेत्र में सैन्य टकराव और तेज होने की आशंका बढ़ गई है.
ईरान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज ने एक बेहद जोखिम भरे मिशन को अंजाम देते हुए अपने लापता एयरफोर्स अधिकारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. यह अधिकारी उस F-15E स्ट्राइक ईगल का हिस्सा था, जिसे ईरान ने मार गिराया था. हादसे के बाद पायलट को तो जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स ऑफिसर दुश्मन इलाके में करीब 24 घंटे तक सिर्फ एक पिस्तौल के सहारे छिपा रहा. अमेरिकी कमांडो ने सफल ऑपरेशन करते हुए उसे रेस्क्यू किया और इलाज के लिए कुवैत भेज दिया गया है.
रणभूमि स्पेशल में आज महायुुद्ध से जुड़ी वो तमाम खबरें हैं जिनपर पूरी दुनिया की नजर है जो सुर्खियों में हैं. रणभूमि स्पेशल में बताएंगे कि ईरान को ट्रंप की धमकी के बावजूद मिडिल ईस्ट में युद्ध भयंकर हो रहा है. ईरान पर अमेरिकी की हर चेतावनी बेअसर दिख रही है. रणभूमि स्पेशल में आपको इस आशंका के वाकिफ कराएंगे कि ईरान अब खाड़ी देशों के पावर प्लांट को निशाना बना सकता है क्योंकि उसने ऐसा करने की धमकी दी है.