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Election Rallies in Covid: कोरोना बढ़े तो बढ़े, लेकिन चुनाव न टलें! देखें 10 तक

Election Rallies in Covid: कोरोना बढ़े तो बढ़े, लेकिन चुनाव न टलें! देखें 10 तक

संविधान ने जनता को जीवन का अधिकार दिया है. उसी संविधान से चुनाव लड़ने, चुनाव कराने का अधिकार भी है, लेकिन बड़ा क्या है? जीवन का अधिकार या फिर चुनावी अधिकार? एक तरफ चुनाव है, दूसरी तरफ कोरोना की तीसरी लहर का तनाव है. इसी चुनाव और तनाव के बीच हर राजनीतिक दल को इलेक्शन ज्यादा प्यारा है, जनता के जीवन का सेलेक्शन नहीं. यूपी में चुनाव आयोग के अधिकारियों ने जब राजनीतिक दलों के साथ बैठक की, एक भी पार्टी ने कोरोना के कारण चुनाव को टालने की बात नहीं की. सबने कहा इलेक्शन हों. बता दें कि सिर्फ 12 दिन के भीतर देश में ओमिक्रॉन का खतरा आठ गुना बढ़ चुका है. 17 दिसंबर को ओमिक्रॉन के केस 100 के पार हुए थे, 28 दिसंबर तक 800 के पार हो चुके हैं. 24 घंटे में कोरोना के नए केस दूसरी लहर के बाद सबसे ज्यादा आ चुके हैं. देश के 22 राज्यों में ओमिक्रॉन की दस्तक हो चुकी है, लेकिन जनता की सलामती चुनने की जगह सर्वदलीय सहमति चुनाव चुनने पर लगी है. देखें 10 तक का ये एपिसोड.

Amid the looming threat of the third wave of coronavirus, five states will go to the polls early next year. Meanwhile, Covid cases in some states have been rising and the third wave is expected to peak around February. As the elections are next door, political activities including rallies have gained momentum. Nevertheless being concerned about the spread of covid, the rallies are being continued in India ahead of polls. Watch this episode of Dastak.

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