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योग: आखिर है क्या?

योग महज शारीरिक व्यायाम या कसरत नहीं है. यह एक तकनीक है जो आपको उस परम मुकाम तक पहुंचा सकती है, जहां एक इंसान पहुंच सकता है.

सद्गुरु, ईशा फाउंडेशन सद्गुरु, ईशा फाउंडेशन

जब आप योग का जिक्र करते हैं तो अधिकांश लोगों के लिए इसका मतलब कुछ मुश्किल या असंभव सी शारीरिक मुद्राएं होती हैं. योग का मतलब शरीर को तोड़ना-मरोड़ना या सिर के बल खड़ा होना नहीं है. योग महज शारीरिक व्यायाम या कसरत नहीं है. यह तो एक तकनीक है जो आपको उस परम मुकाम तक पहुंचा सकती है, जहां एक इंसान पहुंच सकता है. योग का शाब्दिक अर्थ है- जुड़ाव या मिलन. जब आप सृष्टि की हर चीज के साथ एक होने लगते हैं, तो यही योग होता है. अब सवाल उठता है कि कैसे सारी चीजें एक हो सकती हैं?

आज का आधुनिक विज्ञान हमें बताता है कि यह सृष्टि सिर्फ एक ऊर्जा है, जों लाखों-करोड़ों रूपों में हमारे सामने प्रकट हो रही है. दुनिया के सारे धर्म कहते हैं कि भगवान या ईश्वर हर जगह है. एक ही सत्य है जो अलग-अलग रूपों में व्यक्त हो रहा है. एक वैज्ञानिक इसे गणित की मदद से साबित करता है, एक धार्मिक व्यक्ति इस बात पर विश्वास करता है, लेकिन इसका अनुभव किसी को नहीं होता. जबकि एक योगी वो होता है, जो न तो गणित की गणनाओं से संतुष्ट होता है और न ही विश्वास में यकीन रखता है, वह इसे खुद जानना चाहता है, अनुभव करना चाहता है.

अब सवाल यह है कि यह जोड़ या मिलन है क्या? किस चीज़ को हम किस चीज से जोड़ सकते हैं? फिलहाल, दो चीजें हैं- एक चीज है जिसे ‘मैं’ कहते हैं और दूसरी चीज है जिसे ‘तुम’ कहते हैं. इस ‘मैं’ और ‘तुम’ की सोच का विस्तार समुदाय या राष्ट्र के स्तर तक हो सकता है. लेकिन बुनियादी तौर पर यह ‘मैं’ और ‘तुम’ की सोच ही इस दुनिया की सभी तरह के संघर्षों और विरोधों की वजह है.

ऐसा क्या है जिसे आप ‘मैं’ समझते हैं और ऐसा क्या है जिसे आप समझते हैं कि यह ‘मैं’ से अलग है? फिलहाल, आपके अनुभव में, ऐसी कौन-सी चीजें हैं जिन्हें आप ‘मेरा’ समझते हैं? जिसे आप ‘मैं’ या ‘मेरा’ कहते हैं वह है- आपका शरीर, आपका मन, जिसमें आपके विचार और आपकी भावनाएं भी शामिल हैं और आपकी ऊर्जा. हो सकता है कि आपकी ऊर्जा आपके अनुभव में न हो पर आप आसानी से यह अनुमान लगा सकते हैं कि जिस तरह आपका मन और शरीर काम कर रहा है, उसके लिए जरुर कोई ऊर्जा होगी जो इनको अपना काम करने की क्षमता देती होगी. तो यही तीन वास्तविकताएं हैं जिनके साथ आप कुछ कर सकते हैं - शरीर, मन, और ऊर्जा.

योग या आध्यात्मिक प्रक्रिया का कुल मकसद यही है कि आपको एक ऐसे अनुभव तक ले जाया जाए जहां आपके लिए ‘मैं’ और ‘तुम’ जैसी कोई चीज़ न रह जाए. या तो सब कुछ ‘मैं’ बन जाए या फिर सब कुछ ‘तुम’ हो जाए. जो भी माध्यम आपको इस एकत्व तक ले जाता है उसे योग कहते हैं.


तो इस परम एकत्व तक पहुंचने के कितने तरीके हैं? आप केवल उन चीजों को लेकर इस दिशा में काम कर सकते हैं जो आपके पास हैं. अगर आप किसी ऐसी चीज के बारे में बात करते हैं जो आपके अनुभव में नहीं है तो आपके पास दो विकल्प होंगे- या तो उस पर आंख बंद कर विश्वास करें या फिर उसे नकार दें. इन दोनों ही हालातों में आप सिर्फ कोरी कल्पनाओं में खो जाएंगे, कोई प्रगति नहीं होगी. पहले इस बात को अनुभव करना कि अस्तित्वगत तौर पर आप फिलहाल कहां हैं, और फिर अगला कदम उठाना ही प्रगति कहलाता है. योग की सारी प्रक्रिया ही यही है कि आप फिलहाल जहां हैं, उसके आगे आप अगला कदम अज्ञात की ओर बढ़ाते हैं.

अगर योग को एक समुचित वातावरण में पूरी विनम्रता और समग्रता के साथ सिखाया जाए तो यह एक शानदार प्रक्रिया है. यह आपके पूरे सिस्टम को ऐसे पात्र में बदल सकता है, जिसमें आप चैतन्य को सहज अनुभव कर सकते हैं. योग के कुछ ऐसे आयाम हैं, जो आज दुनिया से लगभग गायब हो चुके हैं. मैं उन तमाम आयामों को वापस लाना चाहता हूं. क्योंकि शक्ति हासिल करना, किसी और के ऊपर कब्जा करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन के स्रोत तक पहुंचने के लिए है. यह जीने का एक बेहद शक्तिशाली तरीका है.

- सद्गुरु, ईशा फाउंडेशन

एक योगी और दिव्यदर्शी सद्गुरु, एक आधुनिक गुरु हैं. विश्व शांति और खुशहाली की दिशा में निरंतर काम कर रहे सद्गुरु के रूपांतरणकारी कार्यक्रमों से दुनिया के करोड़ों लोगों को एक नई दिशा मिली है. 2017 में भारत सरकार ने सद्गुरु को उनके अनूठे और विशिष्ट कार्यों के लिए पद्मविभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया है. 
 

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