मेडिकल एस्पर्ट्स का कहना है कि गुर्दा खराब होने के शुरुआती चरण में कोई भी लक्षण सामने नहीं आता है. यह साइलेंट रहता है. यही वह चरण होता है जब बीमारी का इलाज पूरी तरह संभव होता है.
"/> मेडिकल एस्पर्ट्स का कहना है कि गुर्दा खराब होने के शुरुआती चरण में कोई भी लक्षण सामने नहीं आता है. यह साइलेंट रहता है. यही वह चरण होता है जब बीमारी का इलाज पूरी तरह संभव होता है.
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किडनी से जुड़ी बीमारी कितनी खतरनाक? जानें बचाव का तरीका

मेडिकल एस्पर्ट्स का कहना है कि गुर्दा खराब होने के शुरुआती चरण में कोई भी लक्षण सामने नहीं आता है. यह साइलेंट रहता है. यही वह चरण होता है जब बीमारी का इलाज पूरी तरह संभव होता है.

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इस साल इसकी थीम 'किडनी हेल्थ फॉर एवरीवन एवरीवेयर' है.
इस साल इसकी थीम 'किडनी हेल्थ फॉर एवरीवन एवरीवेयर' है.

हर साल एक नई थीम पर वर्ल्ड किडनी डे सेलिब्रेट किया जाता है. इस साल इसकी थीम 'किडनी हेल्थ फॉर एवरीवन एवरीवेयर' है. पिछले कुछ वर्षो में भारत में क्रॉनिक किडनी रोग यानी गुर्दे खराब होने की समस्या तेजी से बढ़ी है. शुरुआती दौर में इस गंभीर रोग से बचा जा सकता है.

मेडिकल एस्पर्ट्स का कहना है कि गुर्दा खराब होने के शुरुआती चरण में कोई भी लक्षण सामने नहीं आता है. यह साइलेंट रहता है. यही वह चरण होता है जब बीमारी का इलाज पूरी तरह संभव होता है. अगर इसका वक्त पर इलाज नहीं किया जाए तो आगे चलकर किडनी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है.

कैसे करें बचाव?

अगर आपको डायबीटीज है तो अपना ब्लड शुगर लेवर नियंत्रण में रखें.अगर आपकी उम्र 60 साल से अधिक है और आपको डायबिटीज है तो अपने ब्लड प्रेशर पर कड़ी नजर रखें. इसे 140/90 एमएम एचजी या इससे कम रखने का लक्ष्य रखें. 60 से अधिक उम्र के ऐसे मरीज, जिन्हें डायबीटीज नहीं है उन्हें अपना ब्लड प्रेशर 150/90 से कम रखने का प्रयास करना चाहिए.

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इन बातों का रखें ध्यान

-स्वस्थ आहार लें

-शरीर का वजन स्वस्थ सीमा में रखें

-नमक का इस्तेमाल कम करें

-अगर आपको डायरिया, उल्टी, बुखार आदि है तो डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए खूब तरल पदार्थ लें

-नियमित रूप से व्यायाम करें

-धूम्रपान या अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल न करें, धूम्रपान से किडनी में रक्तसंचार कम हो जाता है, जिससे पहले से हो चुकी समस्या गंभीर रूप ले सकती है

-पेन किलर या दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल कम करें, क्योंकि ये आपकी किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं

-अगर आप हाई रिस्क ग्रुप में आते हैं तो किडनी फंक्शन की जांच नियमित रूप से कराएं.

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