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जानिए, AIIMS में कैसे होती है कार्डियक सर्जरी

जब हृदय की नसें ब्लॉक हो जाती हैं तो बायपास सर्जरी की जाती है. बायपास सर्जरी में छाती में चीरा लगाकर अंदर से एक धमनी जिसे इंटरनल थोरेसिक आर्टरी कहते हैं का ऑपरेशन किया जाता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर

कॉर्डियक सर्जरी को ओपन हार्ट सर्जरी भी कहा जाता है. ओपन हार्ट सर्जरी दो तरह की होती है. एक जब हृदय की नसें ब्लॉक हो जाती हैं तब और दूसरी जब हृदय के वॉल्व में समस्या आ जाती है. आइए जानते हैं ऐम्स में कैसे की जाती है कार्डियक सर्जरी.

जब हृदय की नसें ब्लॉक हो जाती हैं तो बायपास सर्जरी की जाती है. बायपास सर्जरी में छाती में चीरा लगाकर अंदर से एक धमनी जिसे इंटरनल थोरेसिक आर्टरी कहते हैं का ऑपरेशन किया जाता है. इसमें पहले हाथ या पैर की नस लेते हैं और इसका इस्तेमाल वाहक नली के तौर पर करते हैं. यह तभी किया जाता है जब हृदय की तीनों मुख्य धमनियों में समस्या होती है.

इसको बायपास सर्जरी इसलिए कहते हैं क्योंकि जहां पर ब्लॉकेज होती है उससे आगे बायपास नली के जरिए हृदय की मांसपेशियों में रक्त का प्रवाह कराया जाता है.

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दूसरी सर्जरी होती है हार्ट के वॉल्व की. हृदय के अंदर चार वॉल्व होते हैं. जिनमें से ज्यादातर समस्या बांयी तरफ के वॉल्व में आती है. बांयी तरफ के वॉल्व्स या तो सिकुड़ जाते हैं या फिर लीक करने लग जाते हैं. दोनों ही स्थितियों में इन वॉल्व्स को बदलने की जरूरत पड़ जाती है. इसे भी ओपन हार्ट सर्जरी कहा जाता है.

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इसके अलावा दिल में छेद होने की वजह से जब बच्चों के हृदय का ऑपरेशन किया जाता है तो इसे भी ओपन हार्ट सर्जरी ही कहा जाता है. हालांकि कार्डियक सर्जरी कराने के लिए ऐम्स में मरीजों को 4-5 साल आगे तक की डेट मिलती है.    

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