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मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट नीरजा बिरला से जानिए, लॉकडाउन में तनाव और डिप्रेशन से बचने के तरीके

इंडिया टुडे ई कॉन्क्लेव के वेलनेस सीरीज में नीरजा बिरला ने कोरोना वायरस और मेंटल हेल्थ पर चर्चा की. नीरजा बिरला ने इस मुश्किल वक्त में खुद को संभालने के तरीके बताए.

इंडिया टुडे ई कॉन्क्लेव में नीरजा बिरला ने मेंटल हेल्थ पर की बात इंडिया टुडे ई कॉन्क्लेव में नीरजा बिरला ने मेंटल हेल्थ पर की बात

Mpower की फाउंडर और चेयरपर्सन नीरजा बिरला ने इंडिया टुडे ई कॉन्क्लेव में कोरोना वायरस और मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा की. नीरजा बिरला ने बताया कि यह MPower हेल्पलाइन 3 अप्रैल को लॉन्च की गई थी. यहां अब तक 40,000 कॉल्स आ चुकी हैं. यह तीन भाषाओं में है और चौबीस घंटे इसकी सेवा उपलब्ध है. नीरजा ने बताया कि यहां सबसे ज्यादा कॉल्स मराठी भाषा में महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों से आती हैं जो विस्थापन के मुद्दे पर बात करते हैं. वहीं मुंबई के कॉलर्स मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना चाहते हैं.

नीरजा बिरला ने कहा कि सोशल आइसोलेशन की वजह से ज्यादातर लोग तनाव, डिप्रेशन और अकेलेपन के शिकार हो रहे हैं जोकि चिंता का विषय है. नीरजा बिरला ने बताया कि हमारे पास देश के अन्य हिस्सों से भी जैसे गुजरात और दिल्ली से भी कॉल्स आ रही हैं और हमें इस बात की खुशी है कि हम लोगों की जरूरत में काम आ रहे हैं.

किस विषय पर बात करते हैं कॉलर्स?

नीरजा बिरला ने बताया कि यहां कॉल करने वाले ज्यादातर लोग बताते हैं कि वो इस समय कितना अकेला महसूस कर रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि वह सिर्फ चिल्लाते रहते हैं. कुछ ऐसे लोग हैं जो अपनी नौकरी के बारे में बहुत चिंतित हैं. कुछ लोगो कोरोना वायरस से परेशान हैं. बुजुर्ग अपने बच्चों को लेकर चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि हमारे पास महिलाओं के भी फोन आते हैं लेकिन लगभग 60 फीसदी कॉलर्स पुरुष होते हैं और यह देखकर खुशी होती है कि पुरुष भी अब खुलकर अपनी बातें कहते हैं.

किसी को कब पड़ती है मदद की जरूरत?

नीरजा बिरला ने कहा कि अगर आप परेशान हैं तो सबसे पहले अपने दिल की बात सुनें. ऐसा भी समय आता है जब आप खुद को हारा हुआ महसूस करते हैं और आपको किसी सलाह की जरूरत महसूस होती है. आप असहाय महसूस करते हैं और आपको समझ नहीं आता कि अपनी भावनाओं को कैसे संभालें और खुद पर कैसे काबू करें. अगर आपको ऐसा कुछ महसूस हो रहा है तो आपको कॉल करने जरूरत है.

उन्होंने कहा कि कई बार किसी प्रोफेशनल से बात करने से मन हल्का हो जाता है. आप बस कॉल करिए आपको अच्छा लगेगा. नीरजा ने कहा कि अगर आपकी हालत बहुत खराब है, आप बहुत ज्यादा तनाव और डिप्रेशन महसूस कर रहे हैं तो हमें कॉल करें. हम ऑनलाइन काउंसलिंग भी करते हैं. आप हर दिन एक घंटे के सेशन के लिए अपॉइंटमेंट ले सकते हैं. इससे भी आपको अच्छा लगेगा.

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मानसिक सेहत पर असर

नीरजा बिरला ने बताया कि मेंटल हेल्थ एक फ्लू की तरह है. इसे स्वीकार करें और जरूरत पड़ने पर इसका इलाज कराएं. दिक्कत तब होती है जब लोग यह सोचने लगते हैं कि हमारे साथ कुछ गलत हो रहा है. हम सभी के जीवन में मुश्किल वक्त आता है. नीरजा बीरला ने कहा कि हम मानसिक बीमारियों के बारे में उतनी बात नहीं करते हैं जितनी हमें करनी चाहिए. मानसिक पीड़ा को अभी गलत तरीके से लिया जाता है.

अभिभावकों के लिए विशेष मंत्र

अभिभावकों के लिए विशेष मंत्र के बारे में नीरजा बिरला ने कहा कि यह उनके लिए एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय है. उन्हें परिवार की देखभाल करनी होती है. माता-पिता अपनी भावनाएं बच्चों के सामने नहीं दिखाते हैं. आज के समय में बच्चों को दिन भर व्यस्त रखना बहुत जरूरी है.

उन्होंने कहा कि बच्चे ऑनलाइन क्लासेज ले रहे हैं, सोशल मीडिया पर समय बिताना रहे हैं. आपको ये बात स्वीकार करनी पड़ेगी कि बच्चों का स्क्रीन टाइम पहले से बढ़ने वाला है और इसे लेकर आपको ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है. अगर आपका ध्यान बार-बार इस तरफ जा रहा है तो अपना ध्यान भटकाने की कोशिश करें. समय के साथ चीजें बदल जाएंगी.

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