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क्या ये सिनेमा हॉल है? खुली कॉलर में कोर्ट पहुंचने पर प्रधान सचिव को HC के जज ने लगाई फटकार

पटना हाई कोर्ट में एक आईएएस अधिकारी औपचारिक ड्रेस में नहीं पहुंचे तो जज साहब ने उनकी क्लास लगा दी. जज ने उन्हें बताया कि ये कोई सिनेमा हॉल नहीं है. उन्होंने IAS से यह भी पूछा कि क्या उनकी ट्रेनिंग मसूरी में नहीं हुई थी?

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • क्या आप मसूरी में IAS ट्रेनिंग स्कूल नहीं गए थे?
  • खुली कॉलर में IAS को देख भड़के न्यायाधीश
  • पटना हाई कोर्ट का मामला

देश की अदालतों में ऑनलाइन कार्यवाही की वजह से कई दौरान ऐसी स्थिति पैदा होती है कि उसका वीडियो वायरल हो जाता है. पटना हाईकोर्ट की कार्यवाही का एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. 

बिहार सरकार के प्रधान सचिव (शहरी विकास) आनंद किशोर पटना हाईकोर्ट की एक कार्यवाही के दौरान शर्ट पहनकर आ गए इस दौरान उनकी शर्ट का कॉलर खुला था. इस पर हाई कोर्ट के जज ने उन्हें फटकार लगाई. 

सफेद शर्ट और खुले कॉलर में अदालत की कार्यवाही में पहुंचे IAS पर भड़कते हुए जज ने कहा, ""क्या आप नहीं जानते कि आपको कोर्ट में कौन सा ड्रेस कोड पहनना है? क्या आप मसूरी में IAS ट्रेनिंग स्कूल नहीं गए थे?"

पटना हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने आगे कहा, "यह क्या है? बिहार राज्य में आईएएस अधिकारियों के साथ क्या दिक्कत है. वे नहीं जानते कि अदालत में कैसे पेश होना है? औपचारिक पोशाक का मतलब कम से कम एक कोट है,और कॉलर खुला नहीं होना चाहिए."

अधिकारी ने यह कहते हुए अपना बचाव करने की कोशिश की कि गर्मियों में कोट पहनने के लिए कोई आधिकारिक कोड नहीं है. लेकिन जज इस स्पष्टीकरण से प्रभावित नहीं हुए. "जब आप अदालत में आते हैं तो उचित ड्रेस कोड होना चाहिए. क्या आपको लगता है कि यह एक सिनेमा हॉल है?" सोशल मीडिया पर शेयर किए गए 2 मिनट के वीडियो में ऐसा कहा गया है. 

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बता दें कि अधिकारियों के लिए अदालत में उपस्थिति के लिए औपचारिक पोशाक में होने का चलन है. यहां तक कि केस के वादियों द्वारा भी अदालतों में अनौपचारिक कपड़ों में आने पर जज द्वारा निंदा की जाती है. उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय में, वकीलों और अधिकारियों को उचित पोशाक में नहीं होने आने पर फटकार लगाने के कई उदाहरण हैं. हालांकि  IPS और रक्षा अधिकारियों से अलग आईएएस अधिकारियों के लिए कोई आधिकारिक "ड्रेस कोड" नहीं है, लेकिन अपेक्षा की जाती है कि वे कोट पहनकर अदालती कार्यवाही में आएं. ऐसा पुरुषों के मामले में प्रचलन है. 

 

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