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उत्तराखंड टाइगर रिजर्व निदेशक की नियुक्ति पर विवाद, मुख्यमंत्री कार्यालय ने बयान जारी कर किया आरोपों का खंडन

उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने हाल ही में मीडिया में आई उन रिपोर्टों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक की नियुक्ति में मंत्री, मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों को बायपास कर दिया.

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पुष्कर सिंह धामी- फाइल फोटो
पुष्कर सिंह धामी- फाइल फोटो

उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क के नए निदेशक के रूप में 2004 बैच के आईएफएस अधिकारी राहुल की नियुक्ति पर विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने आरोपों का खंडन किया है. सीएम द्वारा समिति को दरकिनार करने के आरोपों के जवाब में सीएम धामी के कार्यालय ने एक बयान जारी किया है. बयान में कहा गया कि राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के प्रशासन में तैनात अधिकारी के ट्रांसफर पर, मुख्य वन संरक्षक/क्षेत्रीय निदेशक राहुल को मुख्य वन संरक्षक (एच.ओ.एफ.एफ.) कार्यालय के समकक्ष विभागीय कार्यवाही प्रस्तुत करके कोर टाइगर रिजर्व के निदेशक/मुख्य वन संरक्षक (एच.ओ.एफ.एफ.) का दायित्व सौंपा गया था. 

बयान के अनुसार, राहुल द्वारा मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्रीय एवं विभागीय दिशा-निर्देशों का अनुपालन न करने के कारण एम.एफ.आर.ओ. रिपोर्ट की समीक्षा एम.एफ.आर.ओ. के स्थान पर मुख्य वन संरक्षक स्केल्टन एवं लॉ यूनिटी के निर्देशों के क्रम में की जा रही थी. राहुल के विरूद्ध निर्धारित विभागीय कार्यवाही का अनुपालन अभी भी लंबित है.

बयान में कहा गया, अपील के मामले के संबंध में हाई कोर्ट के आदेशों के अनुसार एवं विधि के अनुसार कार्यवाही की जा रही है. साथ ही, हाई कोर्ट 310/2000 के स्तर पर भी मामला विचाराधीन है. केंद्र/राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अनुशासनात्मक कार्यवाही के वर्तमान नियमों के अनुसार किसी के विरूद्ध कोई जांच या कार्यवाही लंबित होने पर उसे नियुक्त करने की शक्ति का कोई प्राधिकार नहीं है. यदि दोनों मामलों में से किसी एक में अनुशासनात्मक नियमों में ढीलापन की सिफारिश की गई है, तो इसके अनुसार, नियुक्ति या ट्रांसफर नहीं दी जा सकती. राहुल के विरुद्ध अधिकारियों की नियुक्ति/ट्रांसफर के संबंध में मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन की अध्यक्षता में 1 जुलाई 2024 को समिति परिषद/बोर्ड की बैठक आयोजित की गयी.

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बयान में कहा गया कि राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक पद पर तैनात साकेत बडोला का ट्रांसफर टाइगर रिजर्व में होने के कारण उन्हें इस पद पर नियुक्त किये जाने का निर्णय लिया गया. इस वजह से शासन के ट्रांसफर/नियुक्ति आदेश संख्या 1581, दिनांक 9 अगस्त 2024 के अनुसार राहुल, मुख्य वन संरक्षक को निदेशक, राजाजी राष्ट्रीय उद्यान का कार्यभार सौंपा गया. राहुल के खिलाफ जांच की मांग की गई है.

क्या है मामला?
उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने हाल ही में मीडिया में आई उन रिपोर्टों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक की नियुक्ति में मंत्री, मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों को बायपास कर दिया. वन मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया था और मुख्यमंत्री और उनकी सहमति के बाद ही इसे मंजूरी दी गई थी.

गौरतलब है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का एक हालिया फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है. यह मामला राजाजी टाइगर रिजर्व के नए निदेशक की नियुक्ति से जुड़ा है. मुख्यमंत्री धामी ने भारतीय वन सेवा के अधिकारी मुख्य वन संरक्षक राहुल को राजाजी टाइगर रिजर्व का निदेशक नियुक्त किया है. राहुल को करीब दो साल पहले कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के प्रमुख के पद से हटाया गया था, जब हाई कोर्ट ने कॉर्बेट में अवैध पेड़ कटाई और निर्माण की योजनाओं पर संज्ञान लिया था.

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वन मंत्री ने पहले राहुल के ट्रांसफर को प्रस्तावित किया जिस पर मुख्यमंत्री ने सहमति दी. इसके बाद मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, और वन मंत्री ने सीएम से फिर विचार करने का आग्रह किया. इसके बाद मुख्यमंत्री ने हाथ से लिखे पत्र में जानकारी दी कि राहुल की तैनाती पहले ही अनुमोदित की जा चुकी है, जिस पर वन मंत्री, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव ने सहमति दे दी.

क्या बोले हरीश रावत?
कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह अत्यधिक गंभीर मामला है. राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी हमारी छवि पर दाग लगा है कि हम कॉर्बेट की भी ठीक तरीके से देखरेख नहीं कर सके और हमारे अधिकारी ऐसे हैं, या हमारे नेतागण ऐसे हैं जिन्होंने मिलकर इतना बड़ा काम कर दिया कि बिना अनुमति के हजारों पेड़ काट दिए. बड़ी बड़ी इमारतें बना दी गई. 

उन्होंने कहा कोर्बेट नेशनल पार्क के तत्कालीन डायरेक्टर के खिलाफ भी CBI जांच बैठी है. वो जांच के दायरे में हैं, अब किस उद्देश्य को लेकर ये जानकारी नहीं थी, क्योंकि IFS ऑफिसर की नियुक्ति बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के नहीं होती है. पूर्व सीएम ने कहा कि मुख्यमंत्री एक प्रकार से इन नियुक्तियों को करते हैं. क्या कारण रहा कि इस तथ्य को बिल्कुल नजरांदाज कर दिया गया कि इनके ऊपर CBI की जांच चल रही है. या तो फिर सरकार ये चाहती होगी कि राजाजी पार्क में भी एक नया पार्क हो. ऐसे लोगों को विशेषज्ञ मान रही होगी और यदि नहीं मान रही है तो जब तक क्लीन चिट नहीं मिल जाती है तब तक उनको ऐसी संवेदनशील पोस्टिंग नहीं दी जानी चाहिए.

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