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शाहजहांपुर लोकसभा सीटः कौन-कौन है उम्मीदवार, किसके बीच होगी कड़ी टक्कर

शाहजहांपुर लोकसभा सीट से 2019 के चुनावी मैदान में 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. हालांकि मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के अरुण कुमार सागर और बहुजन समाज पार्टी के अमर चंदर जौहर के बीच है. कांग्रेस ने ब्रह्मस्वरूप सागर को मैदान में उतारा है. सीपीआई ने मनीष चंद्र कोरी को टिकट दिया है जबकि 3 उम्मीदवार बतौर निर्दलीय मैदान में हैं. शाहजहांपुर में चौथे चरण में 29 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा. जबकि 23 मई को परिणाम आएगा.

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शाहजहांपुर में बीजेपी को कड़ी टक्कर देने के मूड में कांग्रेस (सांकेतिक तस्वीर-ट्विटर)
शाहजहांपुर में बीजेपी को कड़ी टक्कर देने के मूड में कांग्रेस (सांकेतिक तस्वीर-ट्विटर)

उत्तर प्रदेश की शाहजहांपुर लोकसभा सीट भारतीय जनता पार्टी के लिए सम्मान की सीट है क्योंकि स्थानीय सांसद कृष्णा राज केंद्रीय मंत्री रही हैं, और सम्मान के खातिर पार्टी को यहां से जीत हासिल करना जरुरी है. हालांकि बीजेपी ने इस बार अपना उम्मीदवार भी बदल दिया है, लेकिन राज्य में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच चुनावी गठजोड़ होने के बाद यहां का मुकाबला कांटेदार होने की उम्मीद है. कभी इस सीट को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था.

शाहजहांपुर लोकसभा सीट से 2019 के चुनावी मैदान में 14 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. हालांकि मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के अरुण कुमार सागर और बहुजन समाज पार्टी के अमर चंदर जौहर के बीच है. कांग्रेस ने ब्रह्मस्वरूप सागर को मैदान में उतारा है. सीपीआई ने मनीष चंद्र कोरी को टिकट दिया है जबकि 3 उम्मीदवार बतौर निर्दलीय मैदान में हैं. शाहजहांपुर में चौथे चरण में 29 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा. जबकि 23 मई को परिणाम आएगा.

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शाहजहांपुर लोकसभा सीट के राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो 1962 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह संसदीय सीट अस्तित्व में आई. शुरुआती तीन चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की, लेकिन 1977 में सरकार विरोधी लहर में कांग्रेस को यहां से भी हार का सामना करना पड़ा और जीत जनता दल के खाते में गई. हालांकि 3 साल बाद 1980 में जब देश में फिर चुनाव हुए तो कांग्रेस ने जीत के साथ यहां वापसी की. 1980 के बाद 1984 में भी कांग्रेस के टिकट पर जितेंद्र प्रसाद ने जीत हासिल की.

राम लहर में उभरी बीजेपी

90 के दशक में राम लहर के दौर में बीजेपी ने तेजी से यूपी में अपने पैर पसारे और बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई. 1989 और 1991 के चुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की. हालांकि समाजवादी पार्टी ने 1996 के चुनाव में जीत दर्ज कर बीजेपी को झटका दिया. 2 साल बाद 1998 में बीजेपी फिर यहां से जीत गई, लेकिन 1999 में चुनाव में कांग्रेस के जितेंद्र प्रसाद वापसी करने में कामयाब हो गए. 2001 में उनके निधन के बाद 2004 के आम चुनाव में उनके बेटे जितिन प्रसाद इस सीट से चुनाव जीते. 2009 के लोकसभा चुनाव में जीत समाजवादी पार्टी के खाते में गई, लेकिन 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने फिर इस सीट पर जीत हासिल की.

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2014 के लोकसभा चुनाव के आधार पर इस संसदीय सीट पर करीब 19 लाख से अधिक वोटर रहे जिसमें करीब 11 लाख पुरुष और करीब 8 लाख महिला वोटर थे. इस सीट पर भी मुस्लिमों का खासा प्रभाव है और यहां करीब 20 फीसदी मुस्लिम आबादी रहती है.

पिछले आम चुनाव में 57 फीसदी मतदान

शाहजहांपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत 6 विधानसभा सीटें कटरा, जलालाबाद, तिलहर, पुवायां, शाहजहांपुर और ददरौल आती हैं. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में जलालाबाद में समाजवादी पार्टी जीत मिली शेष 5 विधानसभा सीटों पर बीजेपी ने जीत का परचम लहराया.

2014 के लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो उस चुनाव में इस सीट पर मोदी लहर का असर दिखा. बीजेपी के टिकट से चुनाव लड़ने वालीं कृष्णा राज ने करीब ढाई लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की. इस चुनाव में बीजेपी कुल 46.5% वोट मिले जबकि बहुजन समाज पार्टी दूसरे और समाजवादी पार्टी तीसरे नंबर पर रही थी. 2014 में यहां पर करीब 57 फीसदी मतदान हुआ था.

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