हैदराबाद में कई प्रजनन केंद्रों के साथ "सांठगांठ" करके सात महिलाओं और एक पुरुष के नेटवर्क द्वारा संचालित व्यावसायिक सरोगेसी और "अवैध" मानव एग (Human Egg) व्यापार के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया गया है. इस बात की जानकारी एक पुलिस अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को दी. पुलिस ने बताया कि इस रैकेट के सिलसिले में दो एजेंटों - एक महिला (45) और उसके बेटे (27) को गिरफ्तार किया गया है. साथ ही छह दानदाताओं, सरोगेट माताओं को नोटिस जारी किए गए हैं.
साइबराबाद पुलिस की एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि आरोपी अवैध आर्थिक लाभ के लिए निःसंतान दंपतियों का शोषण कर रहे थे. विश्वसनीय सूचना के आधार पर एक स्पेशल पुलिस टीम ने शुक्रवार को जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की मौजूदगी में पेट-बशीराबाद पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक परिसर में छापा मारा. इस दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.
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पुलिस ने बताया कि जांच से पता चला है कि मुख्य आरोपी महिला एजेंट, पहले एग दाता और सरोगेट मां के रूप में काम कर चुकी है. अपने अनुभव और अन्य एजेंटों, प्रजनन क्लीनिकों व केंद्रों के साथ संपर्कों के नेटवर्क का उपयोग करते हुए उसने महिलाओं को एग दाता या सरोगेट मां के रूप में काम करने के लिए भर्ती करना शुरू किया. इसके बाद उन्हें विभिन्न प्रजन्न केंद्रों पर भेजा.
प्रत्येक सफल प्रक्रिया के लिए उसने अच्छी-खासी रकम वसूली. विज्ञप्ति में कहा गया है कि वह आर्थिक रूप से कमज़ोर महिलाओं को निशाना बनाती थी. इसके बाद उन्हें सरोगेट बनने के लिए राजी करती थी और उन्हें अपने घर पर रखती थी.
पुलिस ने बताया कि महिला का बेटा केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक है. वह भी इस अवैध कारोबार को चलाने में उसकी मदद करता था. इस कारोबार से मिलने वाले पैसे से ही दोनों का खर्च चलता था. प्रजनन क्लीनिकों और केंद्रों की कथित संलिप्तता की अभी भी जांच चल रही है.
फिलहाल आरोपी के खिलाफ सरोगेसी विनियमन अधिनियम, सहायक प्रजनन तकनीक अधिनियम और बीएनएस अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. अवैध रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के प्रयास जारी हैं.