असम में केंद्र सरकार के परिसीमन के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. बुधवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार को नोटिस जारी किया है. कानून मंत्रालय ने 28 फरवरी को असम में परिसीमन के लिए आदेश जारी किया था.
याचिकाकर्ता के वकील और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पूछा कि असम में परिसीमन के लिए कैसे आदेश दिया जा सकता है. 5 सितंबर 2015 को असम के संबंध में एक अधिसूचना जारी की गई, जिसमें असम को अंशात क्षेत्र कहा गया है.
मामले की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कुछ उग्रवादी युवाओं को भड़काकर स्थिति को खराब कर सकते हैं. राज्यपाल ने अगस्त 2020 तक पूरे क्षेत्र को अशांत क्षेत्र घोषित किया है. ऐसे में असम कैसे मार्च में ही सामान्य स्थिति में पहुंच गया, जिससे परिसीमन की शुरुआत हो सके.
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2001 के नोटिफिकेशन पर कैसे अभी परिसीमन की शुरुआत हो सकती है. एनआरसी की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है. दरअसल असम अशांत क्षेत्र घोषित है. अशांत क्षेत्र में आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट लागू है.
असम में 1990 से ही यह एक्ट लागू है. यह एक्ट सुरक्षाबलों को ताकत देता है कि राज्य में वे किसी तरह का सर्च ऑपरेशन चला सकते हैं, किसी को भी कहीं बिना पूर्व सूचना के अरेस्ट कर सकते हैं.
असम के अशांत क्षेत्र का स्टेटस इसलिए बढ़ाया गया था क्योंकि राज्य के कुछ हिस्सों में अराजक तत्व मौजूद हैं, जो उग्रवादी गतिविधियों में शामिल हैं. ऐसे में याचिका पर नए परिसीमन को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं.