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जामिया हिंसा: SC ने दखल देने से किया इनकार, याचिकाकर्ताओं को HC जाने का आदेश

सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है और याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया है कि वह इस मामले को लेकर संबंधित हाईकोर्ट में जाएं. हाईकोर्ट ही अपने विवेक पर इस मामले में किसी तरह का फैसला ले सकता है.

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नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ हुआ था प्रदर्शन
नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ हुआ था प्रदर्शन

  • सुप्रीम कोर्ट में जामिया हिंसा पर सुनवाई
  • SC ने याचिकाकर्ताओं को HC जाने से कहा
  • पुलिस की कार्रवाई पर अभी रोक नहीं

नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ दिल्ली के जामिया इलाके में हुई हिंसा पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है और याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया है कि वह इस मामले को लेकर संबंधित हाईकोर्ट में जाएं. हाईकोर्ट ही अपने विवेक पर इस मामले में किसी तरह का फैसला ले सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस हाईकोर्ट में ये मामला जाएगा, वह ही किसी तरह की जांच कमेटी के गठन, छात्रों की गिरफ्तारी पर रोक या फिर छात्रों को मुफ्त की मेडिकल सुविधा देने पर फैसला दे सकता है. याचिकाकर्ताओं की ओर से इस मामले में न्यायिक जांच कराने की मांग की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाईकोर्ट दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की नियुक्ति कर सकता है. इसके साथ ही हिंसा करने वाले छात्रों पर किसी तरह की कार्रवाई पर कोई रोक नहीं लगी है, अदालत ने छात्रों को गिरफ्तार ना करने की मांग को भी ठुकरा दिया है.

इसे पढ़ें: ‘कोई कानून तोड़े तो FIR से कैसे रोकें?’, पढ़ें जामिया हिंसा पर SC ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि हिंसा के दौरान कुल 14 बसें, 22 प्राइवेट कार को आग लगा दी गई. इस दौरान कुल 67 लोग घायल हुए थे. सभी को पुलिस की तरफ से अस्पताल भेज दिया गया था. इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस प्रकार की अफवाह फैलाई जा रही हैं कि पुलिस फायरिंग में छात्रों की मौत हुई है लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं है.

बता दें कि अदालत में दाखिल याचिका में अपील की गई थी कि अदालत इस मामले में हस्तक्षेप करे और तुरंत छात्रों पर की गई कार्रवाई पर एक्शन लें. इसके अलावा घायल छात्रों को मुफ्त में मेडिकल सुविधा दी जाए और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए. याचिकाकर्ताओं की अपील थी कि क्योंकि हिंसा पूरे देश में हो रही है, ऐसे में सर्वोच्च अदालत को इस मामले में दखल देना चाहिए.

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