वैश्विक प्रतिस्पर्धा सूचकांक (Global Competitive Index) में भारत 10 स्थान फिसल गया है. पिछले साल 58वें रैंकिंग पर रहा भारत इस बार 68वें स्थान पर पहुंच गया. खास बात है कि ब्रिक्स देशों में भारत का सबसे बुरा हाल है. हमसे बेहतर तो ब्राजील की स्थिति है. अमेरिका को पीछे छोड़कर इस बार सिंगापुर पहले स्थान पर आ गया है.
अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिशों में जुटी मोदी सरकार के लिए यह अच्छा संकेत नहीं है. गौरतलब है कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ताजा इंडेक्स से पहले भारत ग्लोबल कॉम्पिटिटिव इंडेक्स में 58वें स्थान पर था, लेकिन इस साल भारत ब्राजील के साथ ब्रिक्स देशों में सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से रहा. ट्रेड वॉर के चलते अमेरिका भी नीचे फिसला है.
कॉरपोरेट गवर्नेंस के मामले में 15वें नंबर पर
हालांकि कॉरपोरेट गवर्नेंस के मामले में भारत को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने 15वें स्थान पर रखा है. शेयरहोल्डर गवर्नेंस में दूसरे नंबर पर और मार्केट साइज में भारत को तीसरा नंबर दिया गया है. नवीकरणीय ऊर्जा के मामले में भी भारत को तीसरा नंबर मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक इनोवेशन के मामले में भी भारत को कई उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से ऊपर रखा गया है.
किसने जारी की है सूची
ब्राजील को इस कॉम्पिटिटिव इंडेक्स में 71वें नंबर पर रखा गया है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने इंडेक्स जारी करते हुए कहा कि भारत अब भी आर्थिक स्थिरता के मामले में ऊंचे स्तर पर है और उसका आर्थिक सेक्टर बेहद गहराई पूर्ण है. हालांकि उसने बैंकिंग सेक्टर में कमजोरी की ओर भी ध्यान दिलाया, जो बैड लोन यानी फंसे कर्ज के संकट से जूझ रहा है.