कोविड-19 केसों में तेजी से वृद्धि को लेकर गुरुवार के अंत तक बेंगलुरु सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरने लगा था. यह हकीकत है कि शहर हर दिन अब 2,000 से अधिक नए केस रिपोर्ट कर रहा है. लेकिन पिछले महीने में देश भर में एक और बात भी देखने को मिल रही है और वो है- महामारी को लेकर भारत के महानगरों के हिस्से में पहले से गिरावट आना.
मुंबई से दिल्ली तक, चेन्नई से पुणे और बेंगलुरु तक, मुख्य रूप से भारत के महानगरों पर ध्यान केंद्रित किया गया है. आंकड़ों का फोकस यहीं ज्यादा रहा. मिसाल के लिए जून के शुरू में, सिर्फ तीन शहरों - मुंबई, दिल्ली और चेन्नई का ही भारत के सभी केसों में 40 प्रतिशत और सभी नए केसों में 44 प्रतिशत का योगदान था. लेकिन जैसे-जैसे देश में महामारी का दायरा बढ़ा है, भारत के सबसे बड़े शहरों की हिस्सेदारी में पिछले महीने से गिरावट आई है.
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भारत के 10 सबसे अधिक आबादी वाले शहरों पर बेशक सबसे ज्यादा ध्यान रहा हो लेकिन अब हर पांच नए केसों में सिर्फ एक ही यहां से आ रहा है. सिर्फ एक महीने पहले तक ये बड़े शहर नए केसों में से लगभग आधे केस रिपोर्ट कर रहे थे. 20 जून को जहां इन शहरों में दिल्ली से सबसे अधिक नए केस आ रहे थे. वहीं 20 जुलाई तक इस मामले में स्पॉटलाइट बेंगलुरु में शिफ्ट हो गई.

कुल मिलाकर, 10 महानगरों की अभी भी भारत के सभी केसों में हिस्सेदारी एक तिहाई से अधिक हैं, लेकिन यह पिछले महीने की तुलना में खासी नीचे आई है. जून के दूसरे पखवाड़े में ये 10 शहर मिल कर ही भारत के कुल केसों में से आधे के लिए जिम्मेदार थे.
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लेकिन इनमें से अधिकतर शहरों में ये बदलाव नए केस की संख्या घटने की वजह से नहीं है. सिर्फ मुंबई, दिल्ली और अहमदाबाद ही जुलाई में जून की तुलना में कम नए केस रिपोर्ट कर रहे हैं. वहीं इसके विपरीत बेंगलुरु और पुणे में केसों में खासी बढ़ोतरी देखी गई है.

ये बदलाव देश भर में केसों की संख्या में विस्फोट की वजह से सामने आया है. अब देश में सिर्फ 11 जिलों को छोड़कर सभी जिलों से केस रिपोर्ट हुए हैं. भारतीय जिलों का मध्यमान 100 से 500 केस हैं. एक ऐसे देश के लिए जिसके सबसे बड़े शहर बीमारी को काबू में रखने के लिए जूझ रहे हैं और अस्पतालों में एडमिशन प्रबंधन स्तर तक रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में अन्य जिलों में, खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में, संक्रमण की ऊंची दर चिंता का विषय है.