बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को माफिया सरगना रहे अरुण गवली की वह याचिका स्वीकार कर ली जिसमें एक शिवसेना नेता की हत्या के मामले में निचली अदालत द्वारा उसे सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को चुनौती दी गई है.
महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) की विशेष अदालत के न्यायाधीश पृथ्वीराज सी. चव्हाण ने 31 अगस्त को गवली और 11 अन्य को वर्ष 2007 में शिवसेना के पार्षद कमलाकर जमसांदेकर की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. अदालत ने गवली पर सात लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था.
जमसांदेकर की हत्या उत्तर-पूर्वी मुंबई के घाटकोपर इलाके के असालफा क्षेत्र में भूमि विवाद के सिलसिले में उनके घर के बाहर कर दी गई थी. अंडरवर्ल्ड से राजनीति में कदम रखने वाले गवली को पहली बार इस मामले में सजा सुनाई गई है. वह वर्ष 2004 से 2009 तक निर्वाचित विधायक रहा.
वर्ष 2009 में गवली ने जेल में रहते हुए विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन उसे मुंह की खानी पड़ी. उसकी पार्टी अखिल भारतीय सेना (एबीएस) के सभी अन्य 20 उम्मीदवारों को भी हार का सामना करना पड़ा.
गवली एबीएस का अध्यक्ष है. एबीएस का गठन मुठभेड़ की नीति का विरोध करने के लिए किया गया था, जिसे तत्कालीन शिव सेना-भाजपा सरकार के दौरान गृहमंत्री रहे गोपीनाथ मुंडे ने बढ़ावा दिया था.