प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जालंधर में 106वीं भारतीय साइंस कांग्रेस का शुभारंभ किया. इस विज्ञान कांग्रेस का मुख्य आकर्षण रही चालक रहित सौर ऊर्जा से चलने वाली स्मार्ट बस. यह चर्चित बस एक साल में बनकर तैयार हुई. बस के निर्माण में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के 300 छात्रों और शिक्षकों ने मिलकर काम किया.
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) ड्राइवरलेस कार 30 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलाई जा सकती है और एक बार चार्ज करने के बाद इसे 70 किलोमीटर की दूरी तक चलाया जा सकता है. बस जीपीएस और ब्लूटूथ उपकरणों से लैस है और इसे 10 मीटर के दायरे से नियंत्रित किया जा सकता है. बस में एक समय में 10 से लोग बैठ सकते हैं.
चालक रहित सौर ऊर्जा से चलने वाली इस स्मार्ट बस की खासियत है कि इससे ना तो कोई वायु प्रदूषण होगा और ना ही कोई दुर्घटना. बस में कई किस्म के सेंसर लगे हैं जो बस के आगे आने वाली किसी भी रूकावट के चलते उसे वहीं रोक देते हैं.
चालक रहित बस की तकनीक वायरलेस सिगनल पर आधारित है जिनको अल्ट्रासोनिक और इंफ्रारेड सेंसरों के जरिए पकड़ा जाता है. इस बस की अनुमानित लागत 6 लाख रुपये है और इसका इस्तेमाल एयरपोर्ट जैसी जगहों पर किया जा सकता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां भारतीय साइंस कांग्रेस में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि हमें दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए. इस पर हमारा फोकस होना चाहिए कि Big Data, AI, Blockchain से जुड़ी तमाम तकनीकों की कम कीमत में कारगर इस्तेमाल खेती कैसे हो. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें सिर्फ रिसर्च करने के लिए रिसर्च नहीं करनी है बल्कि अपनी Findings को उस स्तर पर ले जाना है जिससे दुनिया उसके पीछे चले.