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किसान आंदोलन में 'जंगी लाइब्रेरी' का संदेश- उड़ता नहीं, पढ़ता पंजाब

लाइब्रेरी में किताबें पढ़ने के लिए बैठने की व्यवस्था भी की गई है. लेकिन किरणप्रीत कहते हैं कि ज्यादातर किसान महिलाएं और बच्चे किताबें लेकर अपने-अपने ट्रैक्टरों में जाकर पढ़ते हैं. हर किताब के लिए किरणप्रीत बतौर डिपॉजिट कुछ रकम लेते हैं, जिसे किताब लौटाने पर वापस कर दिया जाता है.

सिंघु बॉर्डर पर जंगी लाइब्रेरी सिंघु बॉर्डर पर जंगी लाइब्रेरी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • आंदोलन में लाइब्रेरी, पढ़ने वालों की कतार
  • सिंघु बॉर्डर पर सजी 'जंगी लाइब्रेरी'
  • पंजाब से जुड़े इतिहास पर किताबों की भरमार

दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को डेढ़ महीने से ज्यादा हो चुके हैं. सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन की कई तस्वीरें सामने आई हैं. किसानों के रहने के लिए टेंट की व्यवस्था है तो खाने के लिए अच्छे भोजन का इंतजाम. मौसम की मार से बचने के लिए वाटर प्रूफ टेंट भी लगा दिए गए हैं. लेकिन सिंघु बॉर्डर पर हजारों किसानों की भीड़ में एक लाइब्रेरी लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई है. खास बात यह है कि जिस लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए किताबें रखी हैं उसका नाम है जंगी लाइब्रेरी.

आपने जंगी जहाजों के बारे में सुना होगा, जंगी बेड़ों के बारे में सुना होगा जंगी हथियारों के बारे में सुना होगा लेकिन यह जंगी लाइब्रेरी क्या है? पंजाब से आए किरणप्रीत सिंघु बॉर्डर पर लाइब्रेरी चलाते हैं जहां दो हजार से ज्यादा किताबें रखी हैं. किरणप्रीत कहते हैं कि यह लड़ाई सरकार के खिलाफ है और इस जंग में जागरूकता के लिए किताबें सबसे महत्वपूर्ण हथियार हैं. इसलिए इस लाइब्रेरी का नाम हमने जंगी लाइब्रेरी दिया है.
 
इस लाइब्रेरी में किताबें पढ़ने के लिए बैठने की व्यवस्था भी की गई है. लेकिन किरणप्रीत कहते हैं कि ज्यादातर किसान महिलाएं और बच्चे किताबें लेकर अपने-अपने ट्रैक्टरों में जाकर पढ़ते हैं. हर किताब के लिए किरणप्रीत बतौर डिपॉजिट कुछ रकम लेते हैं, जिसे किताब लौटाने पर वापस कर दिया जाता है.

जंगी लाइब्रेरी

 

खास संदेश देती लाइब्रेरी

इस जंगी लाइब्रेरी में पंजाब के गौरवशाली इतिहास से लेकर दुनिया भर के कई लेखकों के साहित्य हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू और पंजाबी में रखे गए हैं. किरणप्रीत कहते हैं कि अब हर दिन ढाई हजार नई किताबें पंजाब से इस लाइब्रेरी में पहुंच रही हैं क्योंकि पढ़ने वालों की संख्या बढ़ रही है. इस लाइब्रेरी को कई लोग देखते हैं, तो कई खड़े होकर सेल्फी खिंचवाते हैं. लाइब्रेरी पर एक बड़ा सा बोर्ड रखा गया है जिस पर एक संदेश लिखा है, 'उड़ता पंजाब नहीं, पढ़ता पंजाब'.

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उड़ता नहीं, पढ़ता पंजाब
 
किरणप्रीत कहते हैं कि इस संदेश से हम दुनिया को कुछ बताना चाहते हैं. पंजाब के बारे में जो भ्रांतियां फैलाई गई हैं कि वहां के युवा नशे से ग्रस्त हैं. हम उन भ्रांतियों को खत्म करने के लिए यह संदेश दे रहे हैं कि पंजाब उड़ता नहीं है बल्कि पढ़ता है और वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है. 

भ्रम तोड़ने की मुहिम 

इसी जंगी लाइब्रेरी में साहित्य पढ़ रहे दिल्ली के रहने वाले अमनप्रीत से जब हमने बात की तो उन्होंने कहा कि यह लाइब्रेरी बेहद खास इसलिए भी है क्योंकि यहां आंदोलन में रहने वाले और आने वाले लोगों को पंजाब के इतिहास और उसकी परंपरा के बारे में पढ़ने का मौका मिलेगा. इससे उन भ्रांतियों को दूर करने में मदद मिलेगी जिसमें पंजाब और पंजाबियों के प्रति दुर्भावना के तहत गलत बातें फैलाई जा रही हैं, क्योंकि किताब से बड़ा कोई हथियार नहीं है.

 

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