एक छोटा बच्चा अपने माता-पिता के साथ घूमने निकलता है और खो जाता है. अचानक वह 23 साल बाद अपने परिवार से पुलिस बनकर मिलता है. यह कहानी फिल्म 'अमर अकबर एंथनी' से मिलती-जुलती है, लेकिन यह कहानी नहीं हकीकत है. मामला मुंबई के ठाणे इलाके का है.

फिल्म 'अमर अकबर एंथनी' में विनोद खन्ना बचपन में अपनी मां से बिछड़ जाते हैं और फिर पुलिस बनने के बाद अपनी मां से मिलते हैं. ठीक ऐसा ही ठाणे के लोकमान्य नगर में हुआ है. 23 वर्ष पहले गणेश धांगडे अपने घरवालों से बिछड़ गया था और अब जाकर अपने परिवार से मिला है. परिवार वालों को भी यकीन नहीं हो रहा है कि इतने सालों बाद उनका बेटा मिलेगा. यही नहीं, उनका खोया बेटा पुलिस वाला बनकर आया है.

दरअसल, 23 साल पहले 6 साल का गणेश अपने माता-पिता के साथ घूमने निकला था और बिछड़ गया. अपने मां-बाप को ढूंढ़ते-ढूंढ़ते वह मुंबई पहुंच गया. अनाथ बच्चे को देख लोगों ने उसे वर्ली आनंद निकेतन नामक अनाथ आश्रम में दे दिया. बचपन से खेलने के शौकीन गणेश ने खेल की शिक्षा पुणे से पूरी की.

विविध खेल में उसने मेडल भी हासिल किए हैं. वह पुलिस में भर्ती के लिए ठाणे में ट्रेनिग के लिए पहुंचा और पास भी हो गया. उसे भर्ती के समय पुलिस ने सब जांच करने के बाद जब मां-बाप के बारे में जानकारी मांगी तो उसने कहा की वह अनाथ है. पुलिस ट्रेनिंग की जांच कर रहे पुलिस निरीक्षक श्रीकांत सोंडे ने गणेश से बचपन के बारे में जानकारी ली, जिसमें मालूम चला कि वह 6 साल की उम्र में वर्ली के आनंद निकेतन अनाथ आश्रम में आया था. उसके हाथ में उसकी मां का नाम लिखा था और उसने अपने घर के बारे में मामा-भांजा इलाके का जिक्र किया था.

उसकी मां के नाम के सहारे पुलिस लोकमान्य नगर के पास मामा-भांजे इलाके में गणेश की मां की तलाश में जुट गई. पुलिस की तलाश कामयाब हुई और वह घर मिल गया. पुलिस ने घरवालों से पूछा कि क्या कोई बच्चा कभी गुम हुआ था, तो घरवालों ने 23 वर्ष पहले गणेश के गुम होने की बात बताई और यह भी बताया कि उसके हाथ में नाम लिखा है. पुलिस ने घरवालों को गणेश के बारे में बताया और यह भी बताया कि अब उसे पुलिस में नौकरी मिल गई है. इसके बाद ही 23 सालों से बिछड़ा गणेश अपनी मां से मिला.