जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर हिस्सों में अभी भी बाढ़ का असर और कहर बना हुआ है. लेकिन सेना के जवान और राहत बल के लोग बचाव के लिए भरपूर कोशिश कर रहे हैं. उनकी कोशिशों से 77 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है. हालांकि अब भी 4 लाख लोगों के फंसे होने की खबर है. सेनाध्यक्ष दलबीर सिंह सुहाग बुधवार को बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए बुधवार को घाटी का दौरा करेंगे. गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में बचाव कार्य में सेना ने बड़ी भूमिका निभाई है.
हालांकि इस बीच मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक श्रीनगर में बचाव कार्य में जुटे जवानों पर कुछ लोगों ने हमला किया. इस हमले में एनडीआरएफ का एक जवान घायल हो गया. यह हमला उस वक्त हुआ जब सेना के जवान एक जगह से दूसरी जगह मदद के लिए जा रहे थे.
हमला करने वाले लोग सेना के जवानों से एक विशेष क्षेत्र पर ही अपना ध्यान केंद्रित करने को कह रहे थे. जब सेना के जवान अन्य प्रभावित क्षेत्रों में जाने लगे तो स्थानीय लोगों ने उन पर हमला कर दिया. इस हमले एक जवान को हाथ पर कई चोटें आई है. उसे चंडीगढ़ के अस्पताल भेजा गया है.
गौरतलब है कि श्रीनगर में बचान कार्य में लगे सेना के जवानों पर हमले की छिटपुट घटनाएं पिछले एक दो रोज से लगातार सामने आ रही है.
आंकड़ों में राहत और बचाव कार्य
1. आर्मी के 30 अतिरिक्त हेलिकॉप्टर उतारे गए
2. आर्मी ने 5500 किग्रा भोजन सामग्री और दवाएं घाटी में गिराए
3. अब तक 77 हजार लोगों को बचाया गया
4. लोगों के बीच 8 हजार 2 सौ कंबल और 650 टेंट बांटे गए
5. प्रभावित लोगों तक 750 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई
6. वायुसेना के 79 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर बचाव कार्य में जुटे
7. 8200 कंबल और 650 टेंट बांटे गए
8. 1, 50, 000 लीटर पीने के पानी का वितरण
9. 2.6 टन बिस्किट बांटे गए
10. सात टन बच्चों के लिए खाना
11. 28000 हजार फूड पैकेट बाढ़ प्रभावित इलाकों में बांटे गए
12. सेना की 80 मेडिकल टीमें बचाव कार्य में जुटी
13. 2000 हॉस्पिटल बेड शीट, कंबल, पीने के पानी की बोतलें और पका हुआ भोजन बांटा जाएगा
14. भारतीय वायु सेना ने 715 टन राहत सामग्री गिराई
15. सेना की 135 बाउट्स और एनडीआरएफ की 148 बोट्स बचाव कार्य में
16. सड़क संपर्क बनाने में बीआरओ की 5 टीमें, जिसमें 5700 कर्मचारी शामिल है.
सैलाब से तबाह कश्मीर में सेना और NDRF ने झोंकी ताकत
इधर, जम्मू के फ्लाईमंडल में आर्मी ने एक पुल को पुनर्स्थापित किया है. ब्रिगेडियर पीके मिश्रा ने कहा, 'हमने इस पुल को 'राहत सेतु' का नाम दिया है, क्योंकि इसे राहत सामग्री को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा.
बाढ़ में फंसे लोगों की मदद के लिए जम्मू कंट्रोल रूम की ओर से एक मोबाइल नंबर जारी किया गया है. यह नंबर 09469300300 है. इस पर बाढ़ में फंसे लोगों के बारे में सूचना दी जा सकती है.
सेना और एनडीआरएफ समेत कई एजेंसियां राहत और बचाव में लगी है. वायुसेना के 61 हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्टों को राहत कार्य में उतारा गया है. घाटी में आई तबाही में अबतक करीब 215 लोगों के मारे जाने की खबर है. हेलीकॉप्टर के जरिए लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है. इस बीच खबर है कि श्रीनगर में राहत में देरी से खफा लोगों ने एनडीआरएफ की टीम पर पत्थर फेंके है.

जन्नत को तबाह करने के एक सप्ताह बाद कई इलाकों से बाढ़ का पानी उतरने लगा है. लेकिन अब भी तबाही का मंजर बना हुआ है. सड़क और संचार सेवाओं को दुरुस्त करने में सेना के साथ तमाम एजेंसियां लगी हुई है.
जन्नत में तबाही, बर्बादी, कोहराम, मातम और चीख-पुकार
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि 109 सालों में घाटी में आया है यह सबसे भीषण सैलाब है. हालांकि उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि प्रधानमंत्री के दौरे के बाद राज्य सरकार बचाव कार्य में तेजी के साथ जुटी. उनका कहना था कि सरकार हर पीड़ित तक पहुंचेगी.
श्रीनगर एयरपोर्ट पर फंसे लोगों ने स्थानीय प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए एनडीआरएफ के लोगों पर अपना गुस्सा निकाला. लोगों का कहना था कि उन्हें पानी और भोजन नहीं मिल रहा.
दिल्ली से बीजेपी अध्यक्ष सतीश उपाध्याय ने जम्मू कश्मीर के लिए राहत सामग्री को रवाना किया. इस मौके पर उपाध्याय ने कहा कि अगर जरुरत पड़ी तो और राहत सामग्री भेजी जाएगी. इसके साथ देश के अन्य राज्यों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है.
जम्मू कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए उत्तराखंड सरकार ने 10 करोड़ रुपये आर्थिक मदद का एलान किया. यूपी ने 20 करोड़, गुजरात ने 5 करोड़ और अन्य राज्यों ने अपने स्तर पर मदद का ऐलान किया है.
बाढ़ में बचाए गए हर व्यक्ति के पास अपनी-अपनी व्यथा है. उन्होंने बताया कि उनके इलाकों में मदद की गुहार लगाने वाले लोगों की चीख-पुकार शांत हो गई थी, जिसका मतलब यह है कि या तो उनकी मौत हो गई है या फिर उन्होंने खुद को भाग्य के भरोसे छोड़ दिया.