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हरियाणा: कांग्रेस से गठबंधन नहीं करेगी BSP, सभी 90 सीटों पर लड़ेगी चुनाव

हरियाणा में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन नहीं होगा. बसपा के सूत्रों ने आजतक को बताया कि वह राज्य की सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. कुछ दिन पहले ही बसपा ने दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) से गठबंधन तोड़ दिया था.

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बसपा अध्यक्ष मायावती
बसपा अध्यक्ष मायावती

  • हरियाणा में बसपा अकेले लड़ेगी चुनाव
  • कांग्रेस के साथ BSP नहीं करेगी गठबंधन
  • मायावती कई दलों से तोड़ चुकी नाता
  • हरियाणा में 19 फीसदी दलित वोटर

हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन नहीं होगा. बसपा  हरियाणा की सभी 90 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनावी मैदान में उतरेगी. कुछ दिन पहले ही बसपा ने दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) से गठबंधन तोड़ दिया था.

हरियाणा में जेजेपी और बसपा के गठबंधन खत्म होने के बाद कांग्रेस के साथ मिलकर चुनावी कयास लगाए जा रहे थे. इस संबंध में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस की नव नियुक्त अध्यक्ष कुमारी शैलजा और पार्टी के प्रचार समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बीएसपी प्रमुख मायावती से मुलाकात करने खबर आ रही थी. हालांकि बसपा और कांग्रेस दोनों ओर इस मुलाकात का खंडन किया गया है. वहीं, बसपा सूत्रों ने आजतक को बताया है कि वह अकेले सभी 90 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरेगी.

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हरियाणा में 19 फीसदी दलित मतदाता हैं. इसी मद्देनजर कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन के कयास लगाए जा रहे थे. कांग्रेस ने हरियाणा में दलित मतदाताओं को साधने लिए हाल ही में अशोक तंवर की जगह कुमारी शैलजा को पार्टी की कमान सौंपी है.

दरअसल, हरियाणा में बीएसपी का दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (JJP) से गठबंधन था. हालांकि कुछ ही दिन पहले मायावती ने अपना गठबंधन जेजेपी से खत्म कर लिया. मायावती ने ट्वीट कर लिखा था कि बीएसपी एक राष्ट्रीय पार्टी है और सीट बंटवारे में जेजेपी का रवैया ठीक नहीं था इसलिए स्थानीय नेताओं के सुझाव पर गठबंधन खत्म किया जाता है.

हरियाणा में बीएसपी का दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (JJP) से गठबंधन था. हालांकि कुछ ही दिन पहले मायावती ने अपना गठबंधन जेजेपी से खत्म कर लिया. ट्वीटर पर 6 सितंबर को  ऐलान करते हुए मायावती ने लिखा था कि बीएसपी एक राष्ट्रीय पार्टी है और सीट बंटवारे में जेजेपी का रवैया ठीक नहीं था इसलिए स्थानीय नेताओं के सुझाव पर गठबंधन खत्म किया जाता है.

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मायावती ने आईएनएलडी से गठबंधन किया था लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी से गठबंधन तोड़ लिया. इसके बाद मायावती ने बीजेपी से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले राजकुमार सैनी से मिलकर चुनावी किस्मत आजमाया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. ऐसे में खबर थी कि मायावती कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमा सकती हैं, लेकिन इस पर भी ब्रेक लग गया है.

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