बीजेपी के 'पीएम इन वेटिंग' नरेंद्र मोदी ने विवादास्पद अध्यादेश से जुड़े सियासी घटनाक्रम पर कहा है कि यूपीए सरकार देश की जनता की नब्ज नहीं पहचानती है.
नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि दोषी ठहराए जाने वाले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता बचाने के लिए अध्यादेश इसलिए लाया गया था, क्योंकि सरकार को जनभावना का ध्यान नहीं रहा. दिल्ली में एक कार्यक्रम में मोदी ने कहा, 'दिल्ली में बैठी सरकार को देश की नब्ज का पता नहीं है, नहीं तो वे दोषी नेताओं को बचाने वाला अध्यादेश नहीं लाते.'
मोदी ने कहा, 'कोई भी अपराधियों के चुने जाने के पक्ष में नहीं है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का भी इस कदर अपमान हुआ कि वे अमेरिका में बात करने का आत्मविश्वास खो बैठे.' उन्होंने कहा कि देश स्वच्छ राजनेता और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार के पक्ष में है.
गौरतलब है कि केंद्र की यूपीए सरकार ने दागी सांसदों व विधायकों का बचाव करने वाले विवादास्पद अध्यादेश को वापस लेने का फैसला कर लिया है. केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया.
कैबिनेट की बैठक में महज 15 मिनट के भीतर ही यह निर्णय किया गया कि अध्यादेश को राष्ट्रपति से वापस लिया जाएगा. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सबसे पहले अध्यादेश का कड़े शब्दों में विरोध किया था. बाद में उन्हें इस मसले पर सोनिया गांधी का भी साथ मिल गया.
प्रधानमंत्री ने बुधवार दोपहर को ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की थी. अभी अध्यादेश राष्ट्रपति के पास ही है. जानकारी के मुताबिक, अध्यादेश से राष्ट्रपति नाखुश हैं. इसी वजह से सरकार को अध्यादेश वापसी का रास्ता चुनना ज्यादा बेहतर लगा. बहरहाल, अध्यादेश को लेकर कांग्रेस व बीजेपी के बीच जुबानी जंग जारी है.