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टिड्डियों को मारने के लिए छिड़की जा रही दवा, फसलों को हुआ नुकसान

टिड्डियों के आतंक से निजात दिलाने के लिए छिड़की गई दवा अब किसानों के लिए ही खतरा बन गई है. इसके कारण टिड्डियों के आतंक से कुछ हद तक राहत मिली, टिड्डियों की मौत भी हुई है, लेकिन किसानों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है.

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दवा का छिड़काव करते कर्मचारी
दवा का छिड़काव करते कर्मचारी

  • टिड्डियों की मौत के बाद अब आ रही दुर्गंध
  • इन खेतों का चारा न खिलाने की चेतावनी

गुजरात के बनासकांठा जिले में पिछले 10 दिनों से आतंक का पर्याय बने टिड्डियों के दल से फसल को व्यापक क्षति पहुंची है. अब टिड्डियों को मारने के लिए सरकार की ओर से दवा का छिड़काव कराया गया है. इससे भी किसानों की फसल को नुकसान हो रहा है.

टिड्डियों के आतंक से निजात दिलाने के लिए छिड़की गई दवा अब किसानों के लिए ही खतरा बन गई है. इसके कारण टिड्डियों के आतंक से कुछ हद तक राहत मिली, टिड्डियों की मौत भी हुई है, लेकिन किसानों के सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है. टिड्डियों के मौत के बाद खेतों में ही पड़े होने के कारण अब दुर्गंध आने लगी है. इससे सांस लेने में दिक्कत हो ही रही है, साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने का अंदेशा है.

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एक सप्ताह इन इलाकों में न जाने की चेतावनी

प्रशासन की ओर से किसानों को उन इलाकों में एक सप्ताह तक नहीं जाने की चेतावनी दी है, जिन इलाकों में दवा का छिड़काव किया गया है. प्रशासन की ओर से दवा के छिड़काव वाले इलाके के खेतों का चारा भी पशुओं को नहीं खिलाने की सलाह दी है. टिड्डियों के जिंदा रहने पर भी किसान परेशान थे और अब कुछ हद तक टिड्डियों से निजात मिली तब भी किसान परेशान हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

शासन और प्रशासन का दावा है कि टिड्डियों को मारा जा चुका है, लेकिन एक्सपर्ट्स की राय इससे इतर है. कृषि एक्सपर्ट्स का कहना है कि मादा टिड्डियां रण के इलाके में वापस लौट चुकी हैं. वो जमीन के अंदर अपने अंडे रखती हैं, इसके कारण टिड्डियों के झुंड के फिर से आने के आसार हैं. विशेषज्ञों की मानें तो इनका पूरी तरह से खात्मा करने के लिए सरकार को रण के इलाके में इस दवा का छिड़काव कराना होगा.

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