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इस लड़की ने 108 दिन में बाइक से किया भारत भ्रमण, केंद्रीय मंत्री बोले- ये बेटी देश का गौरव

नीतू न्यारा नामक संगठन चलाती हैं. नीतू ने राइड फॉर यूथ जागरूकता अभियान के तहत युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया. उनकी संस्था के 2 युवाओं ने 26 सितंबर 2020 को 'विश्व नदी दिवस' ​​पर 'जल है तो कल है, प्रकृति है तो हम हैं' के नारे के साथ राइड की शुरुआत की थी.

राइड खत्म करने के बाद दिल्ली में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ नीतू. राइड खत्म करने के बाद दिल्ली में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ नीतू.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत के चारों कोनों को कवर कर 20,356 किमी की राइड की
  • पर्यावरण-जल संरक्षण का संदेश 10,000 युवाओं तक पहुंचाया
  • इससे पहले 4600 किलोमीटर की स्कूटी राइड भी कर चुकीं

पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने के मकसद से भारत भ्रमण पर बाइक से निकलीं नीतू चोपड़ा ने शुक्रवार को अपनी यात्रा खत्म की. दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट तथा जल मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत समापन कार्यक्रम में मौजूद रहे. नीतू ने बताया कि 12 जनवरी युवा दिवस पर यात्रा खत्म होनी थी, लेकिन एक्सिडेंट में बाइक खराब होने की वजह से 2 दिन की देर हो गई. नीतू ने '20000+ किमी  फोर यूथ, युवा जागेगा तभी तो देश बचेगा' की थीम को लेकर यात्रा की है. इस दौरान शेखावत ने कहा कि ये बेटी प्रधानमंत्री की संकल्पना शसक्त युवा और महिला सशक्तिकरण का बेमिसाल उदाहरण है. नीतू राजस्थान के बाड़मेर की रहने वाली हैं.

नीतू ने 108 दिन में भारत के 28 राज्यों, 9 केंद्र शासित प्रदेशों और भारत के चारों कोनों को कवर कर 20,356 किमी की राइड की. उन्होंने पर्यावरण और जल संरक्षण के संदेश को भारत के 10,000 युवाओं तक पहुंचाया. हमारा लक्ष्य 1 लाख युवाओं से मिलना था, लेकिन महामारी की स्थिति में, हमने कोरोना प्रोटोकोल का पालन करते हुए अधिक युवाओं को सम्बोधित नहीं किया.

नीतू न्यारा नामक संगठन की संस्थापिका हैं. नीतू ने राइड फॉर यूथ जागरूकता अभियान के तहत देशभर में संवाद सत्र कर युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया. उनकी संस्था के 2 युवाओं ने 26 सितंबर 2020 को 'विश्व नदी दिवस' ​​पर 'जल है तो कल है, प्रकृति है तो हम हैं' के नारे के साथ इस परियोजना की शुरुआत की और जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को 1 लाख युवा तक पहुंचाने.

नीतू ने बताया कि हम बिना पैसे के राइड  कर रहे थे, इसलिए टायर फटने से लेकर बाइक के सभी हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने तक, पेट्रोल पंपों पर ठहरने से लेकर 5-सितारा होटलों तक के अनुभव चुनौतिपूर्ण रहे. उत्तरी पूर्वी क्षेत्र की सेवन सिस्टर की राइड में एक महीने का समय लगा. अंडमान में 8 दिन और लक्षद्वीप में 10 दिन का समय लगा. मोटर साइकिल को जहाज से द्वीप पर ले जाने की वजह से काफी समय खर्च हुआ.

अंडमान में साथी मुकुल के अस्वस्थ होने से उसे घर लौटना पड़ा. राइडर नीतू ने इस राइड को अकेले ही अंजाम दिया. अकेले राइडर के लिए 600-800 किमी प्रतिदिन राइडिंग बहुत कठिन हो गई. चेन्नई से कन्याकुमारी, कन्याकुमारी से गोवा, गोवा से सूरत तक, लड़की होते हुए भी नीतू ने 25 से 28 घंटे तक लगातार राइड की. 

नीतू ने आगे कहा कि जब लोग मुझसे पूछते थे कि एक लड़की होते हुए भी आप अकेले सवारी कर रही हैं, आप डरती नहीं हैं? पैसे के बिना आप कैसे प्रबंधन करती हैं? क्या आपको पीठ दर्द नहीं होता ? ये सवाल मेरी ऊर्जा और हौंसलों को दुगुना कर देते थे. 

नीतू की यह दूसरी राइड है, उनकी पहली सवारी प्रियंका रेड्डी के सामूहिक बलात्कार मामले के विरोध में थी. जो 18 दिनों में पूरी हुई थी, उन्होंने एक्टिवा से 4600 किलोमीटर की सवारी करते हुए, 10 राज्यों के 32 स्थानों पर आत्म सुरक्षा प्रशिक्षण देने का को कोशिश की थी. इसे विश्व रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया था.

नीतू चोपड़ा के इनपुट के साथ

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