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21 साल से भी पुराने केस पर देरी से पहुंचते हैं 'सरकारी वकील', कोर्ट ने फटकारा

कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पब्लिक प्रोसिक्यूटर के हर रोज 12 बजे आने से कोर्ट वक्त पर शुरू नहीं हो पाती है. 21 साल पुराना मामला खत्म नहीं हो पा रहा है क्योंकि क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए यहां पब्लिक प्रोसिक्यूटर नहीं होते हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

तीस हजारी कोर्ट में सीबीआई के डायरेक्टर ऑफ प्रोसिक्यूशन को बुलाकर स्पेशल सीबीआई जज कामिनी लाऊ ने जमकर फटकर लगाई है. दरअसल पूर्व केंद्रीय मंत्री पी के थुंगन के एक मामले में सुनवाई के दौरान सीबीआई के पीपी कोर्ट में कई बार पेश नहीं हुए थे, जिससे कोर्ट नाराज था. कोर्ट में सीबीआई के डायरेक्टर ऑफ प्रोसिक्यूशन को कहा कि रोजाना पब्लिक प्रोसिक्यूटर देरी से आते हैं.

कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पब्लिक प्रोसिक्यूटर के हर रोज 12 बजे आने से कोर्ट वक्त पर शुरू नहीं हो पाती है. 21 साल पुराना मामला खत्म नहीं हो पा रहा है क्योंकि क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए यहां पब्लिक प्रोसिक्यूटर नहीं होते हैं. सीबीआई डायरेक्टर ऑफ प्रोसिक्यूशन ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा मामले बहुत हैं द्वारका कोर्ट भी पब्लिक प्रोसिक्यूटर को जाना पड़ता है तब कोर्ट ने कहा हमें मालूम है द्वारका कोर्ट में ना के बराबर मामला है.

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आपको बता दें कि स्पेशल सीबीआई कोर्ट क्वार्टर के वितरण में अनियमितता से जुड़े मामले में सुनवाई कर रही है. इस मामले में थुंगन और 17 अन्य लोग आरोपी हैं. कुल 18 आरोपियों में से 3 की अब तक मौत हो गई है और इनमें से ज्यादातर सीनियर सिटीजन हैं.

इस मामले में 1996 में केस रजिस्टर किया गया था जबकि सीबीआई को चार्जशीट फाइल करने में ही 7 साल लग गए. 2003 में चार्जशीट दायर की गई. कोर्ट ने इस मामले मे रोजाना सुनवाई का फैसला किया है. केस 20 साल से भी ज्यादा पुराना है इसलिए कोर्ट रोजाना सुनवाई कर मामला जल्द से जल्द खत्म करना चाहती है.

 

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