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भीमा कोरेगांव केस: स्‍ट्रॉ और सिपर के लिए फादर स्‍टेन स्‍वामी को करना होगा इंतजार

83 वर्षीय फादर स्‍टेन स्‍वामी ने छह नवंबर को एक याचिका दाखिल की थी. जिसमे उन्होंने स्‍ट्रा-सिपर कप वापस देने की मांग की थी.

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फादर स्टेन स्वामी की याचिका खारिज (सांकेतिक फोटो)
फादर स्टेन स्वामी की याचिका खारिज (सांकेतिक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पार्किंसंस की बीमारी से पीड़ित हैं 83 साल के स्‍टेन स्‍वामी
  • फादर स्‍टेन स्‍वामी ने वापस मांगी थी जब्‍त स्‍ट्रा-सिपर

भीमा-कोरेगांव मामले में कथित संलिप्तता को लेकर अरेस्ट किए गए 83 वर्षीय फादर स्‍टेन स्‍वामी को स्‍ट्रा-सिपर कप के लिए अभी और इंतजार करना होगा. सूत्रों के मुताबिक NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने अरेस्‍ट के दौरान जब्‍त किए गए स्‍ट्रा और सिपर को वापस करने संबंधी फादर स्‍टेन स्‍वामी की याचिका के जवाब में कोर्ट को कहा है कि उन्हें एजेंसी ने गिरफ्तार नहीं किया है.  NIA ने कहा है कि उन्हें गिरफ्तार करने के बाद सीधे ज्‍यूडीशियल कस्‍टडी में भेजा गया था. इसलिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी के पास स्‍ट्रा-सिपर कप या उनका कोई भी अन्य सामान नहीं है.   

83 वर्षीय फादर स्‍टेन स्‍वामी ने छह नवंबर को एक याचिका दाखिल की थी. जिसमे उन्होंने स्‍ट्रा-सिपर कप वापस देने की मांग की थी. क्योंकि फादर स्‍टेन स्‍वामी पार्किंसन बीमारी के मरीज हैं और हाथ स्थिर नहीं रहने की वजह से वह गिलास नहीं पकड़ सकते हैं.  

स्‍पेशल कोर्ट ने एनआईए के जवाब के बाद फादर स्‍टेन स्‍वामी के आवेदन को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने इस मामले में जेल अथॉरिटी से जवाब मांगा है. फादर स्‍टेन ने स्‍ट्रा-सिपर कप और सर्दी से बचने के कपड़ों की मांग की थी. नया आवेदन डालने की स्थिति में कोर्ट अगले शुक्रवार को अब इस मामले में सुनवाई करेगी.  

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फादर स्‍टेन स्‍वामी को 8 अक्टूबर को रांची स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था. इससे पहले कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. NIA के मुताबिक भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में फादर स्‍टेन स्‍वामी की भूमिका काफी अहम थी.  

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क्या है भीमा-कोरेगांव मामला?

1 जनवरी 2018 को पुणे के समीप कोरेगांव-भीमा गांव में दलित समुदाय के लोगों का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था, जिसका कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने विरोध किया था. एल्गार परिषद के सम्मेलन के दौरान इस इलाके में हिंसा भड़की थी, जिसके बाद भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी और दुकानों-मकानों में तोड़फोड़ की थी.

इस हिंसा में एक शख्स की जान चली गई और कई लोग जख्मी हो गए थे. जिसके बाद महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था. 

 

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