मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का मानना है कि भारत के छोटे शहरों से आये क्रिकेटरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप में अपना प्रभाव छोड़ा है क्योंकि ये क्रिकेटर कुछ बड़ा करने के लिये हमेशा तत्पर रहते हैं.
तेंदुलकर ने कहा कि मुझे लगता है कि छोटे शहरों से आये खिलाड़ियों में अपने क्रिकेट कौशल को चमकाने के लिये ज्यादा त्याग की भावना होती है और वे कुछ बड़ा करने के लिये हमेशा तत्पर रहते हैं.
तेंदुलकर ने एक पत्रिका को बताया कि धोनी ने मुझे बताया है कि रांची जैसे शहरों में भी क्रिकेट सुविधायें बहुत कम हैं. धोनी या मुनाफ पटेल का क्रिकेट खेलने का अपना ही अलग तरीका है. धोनी दिल से फुटबाल खेलता है जिससे वह तेजी से रन बना पाता है और वह मजबूत है.
उन्होंने कहा कि भारतीय क्रिकेट का मूल केन्द्र मुंबई या बेंगलूर से हट कर छोटे शहरों में चला गया है. हमारा कप्तान रांची से है और मुनाफ पटेल, एस श्रीसंत और पीयूष चावला भी छोटे शहरों से हैं और इनमें क्रिकेट कौशल कूट कूट कर भरा है.
भारत की विश्व कप की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले तेंदुलकर ने यह ट्राफी क्रिकेट के चाहने वालों खासकर सेना के जवानों को समर्पित की.